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काशी में दुर्लभ संयोग में हुआ अटलजी का अस्थि विसर्जन
गुंजन श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 26 Aug 2018 11:31 AM IST
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atal bihari
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अस्थि कलश काशी में मां गंगा की गोद में समाहित हो गया। अटल जी को काशी से लगाव था और यहीं गंगा की गोद में वह लीन हो गये। जिस समय अटलजी का अस्थि कलश गंगा में विसर्जित किया गया, उस समय दुर्लभ संयोग था। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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चतुर्दशी तिथि का शोभन योग, सावन माह, शिव की नगरी, शनिवार का दिन, मां गंगा की गोद, मूसलाधार बारिश...। इस दुर्लभ संयोग में भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों को मोक्ष की कामना से यहां विसर्जित किया गया।
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बीएचयू के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश प्रसाद मिश्र और ज्योतिषी कंचन चतुर्वेदी ने बताया कि शिव पुराण में उल्लेख है कि तिथियों में चतुर्दशी शंकर का दिन है। शाम पौने छह से सवा छह बजे के बीच अस्थि विसर्जन के दौरान शोभन योग था। इसे शुभ माना जाता है। शनिवार के दिन चंद्रमा राशि पर मोक्षदायिनी गंगा में बारिश के बीच विसर्जन बहुत शुभ है।
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अस्थियां विसर्जित होने के बाद बारिश की रफ्तार कम हुई। इससे पूर्व फूलपुर से राजेंद्र प्रसाद घाट के बीच कई स्थानों पर 11, 21 और 51 ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कराई।
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जिले की सीमा में प्रवेश के साथ ही कभी धीमी तो कभी तेज गति से मेघ बरसने के बावजूद लोग यात्रा से लोग जुड़ते चले गए और कारवां बन गया। कोई गाड़ी तो कोई पैदल ही यात्रा के साथ चला।