पूरे प्रदेश में इस वक्त विधानसभा चुनाव को लेकर उत्साह का माहौल है। नई सरकार चुनने के लिए हर कोई उतावला है लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा की सबसे अंतिम सीट के 11 गांवों में कोई रौनक नहीं है। यहां के लोगों के चेहरे पर मायूसी है। यह वही 11 गांव हैं जो इस बार विधानसभा चुनाव में अंतिम बार वोट देंगे। चुनाव बीतने के बाद यह गांव भी अतीत का हिस्सा हो जाएंगे। इसके बाद वह फिर किसी चुनाव में शामिल नहीं हो पाएंगे। दरअसल, सोनभद्र जिले का यह गांव निर्माणाधीन कनहर बांध के डूब क्षेत्र में है। इसी वर्ष के अंत में बांध के पूर्ण होते ही यह गांव अथाह पानी में समा जाएंगे।
विस्थापन के बाद यहां लोगों की तो नई पहचान हो जाएगी लेकिन उनके गांव का अस्तित्व नहीं रहेगा। यूपी, झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा पर पिछले चार दशकों से बन रहा कनहर सिंचाई परियोजना को वर्ष 2022 में पूरा करने का लक्ष्य है। इसके लिए जोर-शोर से काम चल रहा है। फिलहाल यहां फाटक लगाए जा रहे हैं।
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बन रहा कनहर बांध।
- फोटो : अमर उजाला।
दुद्धी ब्लॉक का कोरची, सुंदरी, भिसुर, लांबी, सुगवामान, कुदरी, अमवार, गोहड़ा, रनदहटोला, बरखोहरा, बघाडू गांव इस सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र में है। बांध के पूरा होते ही यह गांव पूरी तरह डूब जाएंगे। यहां के लोगों को अन्यत्र विस्थापित करने की कवायद चल रही है। अपना मूल छोड़ने की मायूसी हर चेहरे पर है। वह नई जगह बस तो जाएंगे लेकिन वर्षों से जिस गांव की पहचान के साथ जीते रहे हैं, वह अब उनके साथ नहीं रहेगा।
गांव बचाने के लिए अरसे से चलता रहा है संघर्ष
अपने गांव को बचाने के लिए यहां के लोगों ने खूब संघर्ष किया लेकिन किसी भी दल ने उनकी मदद नहीं की। यही कारण है कि चुनावी दौर में भी यहां कोई रौनक नहीं है। गांव में किसी भी राजनीतिक दल की कोई चर्चा तक नहीं हो रही है। ग्रामीण हर दल के लोगों से काफी खफा हैं। कोरची गांव के पूर्व प्रधान गंभीरा प्रसाद ने कहा कि 1976 से कनहर सिंचाई परियोजना का निर्माण कार्य हो रहा है लेकिन शासन प्रशासन की लापरवाही से अभी तक हजारों विस्थापितों को मुआवजा नहीं मिल पाया है।
भिसुर के पूर्व प्रधान संतोष यादव, प्रधान दीनानाथ, चंद्रमणि खरवार, सुंदरी के पूर्व प्रधान फणीश्वर जायसवाल, कोरची के प्रधान रामलाल ने कहा कि कनहर सिंचाई परियोजना में 21 गांव डूब रहे हैं। इसमें यूपी के 11 गांव हैं। बांध का 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया है लेकिन सरकार की ओर से अब भी विस्थापित परिवारों को मुआवजा नहीं दिया गया है।
सौ गुना से अधिक हो चुकी है परियोजना की लागत
कनहर सिंचाई परियोजना अमवार का निर्माण 1976 में शुरू हुआ था। तब इसकी लागत 27.75 करोड़ रुपये थी। राजनीतिक खींचतान में देरी के कारण परियोजना की लागत 2014 में 2239 करोड़ तक हुई थी। इसे पूरा करने का लक्ष्य 2022 में तय किया है। परियोजना की पूर्णता लागत 3252 करोड़ तक पहुंच जाएगी। इसमें अब तक विस्थापितों में 303 करोड़ रुपयों का वितरण कर दिया गया है।