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शहीद की याद में गुजरा दिन: नहीं थम रहे पिता के आंसू, मां-पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल, ढाई साल पहले हुई थी शादी

Sat, 24 Dec 2022 08:35 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Sat, 24 Dec 2022 08:35 PM IST
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Muzaffarnagar: There is mourning in the family and village in the memory of martyr army hero Lokesh Sehrawat
विलाप करते परिजन। - फोटो : amar ujala

सिक्किम हादसे में शहीद हुए युसूफपुर के लाल सेना नायक लोकेश सहरावत की शहादत के बाद दिनभर गांव में लोगों की आवाजाही लगी रही। हर लम्हा शहीद की यादों और बातों में गुजरा। रविवार को पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा और सैनिक सम्मान के साथ विदाई दी जाएगी। वहीं केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने भी दुख जताया है।





बृहस्पतिवार रात ही लोकेश कुमार की शहादत का समाचार गांव पहुंचा था। शुक्रवार को दिनभर गांव में सन्नाटा पसरा रहा। सैकड़ों लोग शहीद के घर सांत्वना देने पहुंचे। रविवार सुबह तक शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचेगा। निजी भूमि में शहीद का सैनिक सम्मान के साथ गांव में ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।

Muzaffarnagar: There is mourning in the family and village in the memory of martyr army hero Lokesh Sehrawat
गमजदा परिजन। - फोटो : amar ujala

अंतिम संस्कार स्थल का प्रशासनिक अधिकारियों सहित राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉक्टर वीरपाल निर्वाल ने निरीक्षण किया। अंतिम संस्कार स्थल के आसपास सहित मुख्य मार्गों की साफ सफाई का कार्य किया जा रहा है।

Muzaffarnagar: There is mourning in the family and village in the memory of martyr army hero Lokesh Sehrawat
गमजदा परिजन। - फोटो : amar ujala

ढाई साल पहले शादी, कोई संतान नहीं
लोकेश कुमार 2013 में जबलपुर से 25 ग्रेनेडियर (सेना) में भर्ती हुए थे। वे एक माह की छुट्टी पूरी कर दस दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे। लोकेश किसान उदयवीर का इकलौता बेटा था, जिससे पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सेना नायक लोकेश की लगभग ढाई वर्ष पूर्व तनु के साथ शादी हुई थी। उनके कोई संतान भी नहीं है। बड़ी बेटी रश्मि शादीशुदा है। मां कुसुम सहित समस्त परिवार का रो-रो कर बुरा हाल था।

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Muzaffarnagar: There is mourning in the family and village in the memory of martyr army hero Lokesh Sehrawat
फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala

गम में डूबे साथी, पिता की आंख से बह रहे आंसू
शहीद लोकेश के निकट के साथी अनुज, अवतार, अंकित, विनीत, अनिल सहित प्रधान राजेंद्र सिंह, ताऊ अशोक कुमार, सुभाष चंद, चाचा सतीश सहरावत, कवि विभोर कुमार का कहना है कि लोकेश खेल ही नहीं खेती में भी निपुण थे। वे नेशनल स्तर का वॉलीबाल खिलाड़ी थे। बेहतर खेल के कारण ही वो सेना में भर्ती हुए थे। तीन वर्षों से टीम में नहीं खेल रहे थे। जब भी वह छुट्टी आते थे तो पिता उदयवीर को ज्यादा मेहनत ना करनी पडे़, इसलिए खुद ही खेती बाड़ी के कार्य में लग जाते थे।

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Muzaffarnagar: There is mourning in the family and village in the memory of martyr army hero Lokesh Sehrawat
शहीद के घर पुलिस तैनात। - फोटो : amar ujala

मुजफ्फरनगर बाईपास से शुरू होंगे अंतिम दर्शन
ग्रामीणों ने बताया कि रविवार सुबह सवेरे गांव से काफी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली मुजफ्फरनगर बाईपास पर जाकर खड़े हो जाएंगे। तिरंगे लगे ट्रैक्टर-ट्रॉली के लंबे काफिले के साथ यूसुफपुर के लाल शहीद लोकेश का पार्थिव शरीर गांव में लाया जाएगा।

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