संभल के जुनावई के गांव हरगोविंदपुर में रविवार को भी सन्नाटा सा दिखाई दिया। जो लोग पेड़ की छांव या घर के आंगन में बैठे दिखाई दिए। या तो वह मायूस थे या हादसे को लेकर चर्चा कर रहे थे। जिसमें दूल्हे समेत आठ लोगों की हादसे में जान गई है वह सभी पासी समाज से आते हैं।
हर किसी की जुबान पर सवाल है कि हादसा हुआ तो हुआ कैसे। कितनी स्पीड थी जो कार के भी परखच्चे उड़ गए। सभी को इस हादसे का बेहद अफसोस है।सूरज की मां संतोषी की हालत खराब है। वह पत्थर जैसी बन गई हैं। न बोलती हैं न आंसू निकल रहे।
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संभल एक्सीडेंट में दूल्हे समेत आठ की मौत
- फोटो : संवाद
पिता की आंखों में आंसुओं का समुंदर
वहीं पिता सुखराम की आंखें बेटे की याद में हर समय आंसुओं से भरी डबडबा रही हैं। छोटा भाई आकाश खामोश है। संतोषी से जब सूरज को लेकर बात की तो वह रोने लगीं।
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संभल एक्सीडेंट में दूल्हे समेत आठ की मौत
- फोटो : संवाद
उन्होंने बताया कि बरात रवाना होने से पहले बेटे से कहा था कि ससुरालियों से आदर के साथ मिलना। किसी दोस्त की बात में आकर गलत काम न करना। दुल्हन की विदाई करके जल्दी आना।
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संभल एक्सीडेंट में दूल्हे समेत आठ की मौत
- फोटो : संवाद
बताया कि बराती तो पहले ही चले गए थे। सूरज की गाड़ी कुछ देर से निकली थी। घर पर रस्म अदायगी के चलते देर हो गई थी। बताया कि बेटे के दूल्हा बनकर जाने की खुशी चेहरे से कम नहीं हुई थी कि हादसे की खबर मिल गई। यह कहते ही वह चीख-चीख कर रोने लगीं। पिता सुखराम आंसू भरी आंखों के साथ अपने दिल पर हाथ रखकर बैठे रहे।
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क्षतिग्रस्त बोलेरो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
'नई कार लाते ही रवि ने सूरज से कहा था मेरी कार में दूल्हा बनकर जाएगा तू'
सूरज और रवि एक गांव के होने के नाते बचपन के दोस्त भी थे। रवि ने अपनी मां प्रेमवती के नाम तीन महीने पहले जब कार खरीदी थी तो सूरज को फोन कर जानकारी दी थी। कहा था कि मेरी कार में ही दूल्हा बनकर दुल्हन के घर जाएगा।