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विश्व धरा दिवस: घरों में कैद हुआ इंसान, गुनगुना रही फिजा, शहर में नाचा मोर, बालकनी में कूकी कोयल

Wed, 22 Apr 2020 04:51 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 22 Apr 2020 04:51 PM IST
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World earth day: Birds and animals returned to city amid lockdown in meerut
nature photography, birds - फोटो : amar ujala

मोर आजकल जंगल में ही नहीं नाचता। सिविल लाइन जैसे पॉश इलाके में भी अब रोज सड़कों पर झूमता नजर आ रहा है। बेगमपुल के ऊपर तोते उड़ रहे हैं तो चिड़ियों की गुनगुनाहट शहर के हर इलाके में सुनाई दे रही है। कानों में रस घोलती कोयल की कूक हो या फिर बालकनी और घर के आंगन में आकर गुनगनाती नन्हीं चिड़िया का कलरव। ये नजारा आजकल शहर में हर तरफ नजर आ रहा है।



दिल्ली रोड हो या फिर शहर में बेगमपुल जैसा व्यस्त रहने वाला चौराहा। लॉकडाउन के इस एक महीने में इंसान जहां घरों में कैद हुए हैं वहीं, कभी-कभार ही दिखने वाले जीव-जंतु और पंछी बड़ी तादात में नजर आने शुरू हो गए हैं। कोई काॅलोनी, सड़क ऐसी नहीं हैं जहां इन पंछियों का कलरव मन नहीं मोह ले रहा है। गुनगुनाकर...इठलाकर...मानो वे इंसान से कह रहे हों...ये पृथ्वी तुम्हारी ही नहीं हमारी भी है...

World earth day: Birds and animals returned to city amid lockdown in meerut
nature photography, birds - फोटो : amar ujala

पिछले एक महीने से मेरठ ही नहीं, हर जगह का माहौल बदला-बदला है। एक तरफ जहां कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन ने सबको घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है।

जिस वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण को कोई सरकार खत्म नहीं कर पाई। सबकुछ बंद होने के कारण वह खुद-ब-खुद बहुत कम रह गया है।
एकतरफ जहां जगह-जगह सन्नाटा पसरा है वहीं, इस समय पंछियों का कलरव बहुत बढ़ गया है। कोई जगह ऐसी नहीं जहां पर पंछियों की आवाज मन को न मोह लेती है।

World earth day: Birds and animals returned to city amid lockdown in meerut
nature photography, birds - फोटो : amar ujala

ऐसा नहीं है कि ये पंछी अचानक कहीं से आ गए हैं। ऐसा भी नहीं है कि एक महीने में इनकी संख्या बढ गई है। फर्क बस इतना है कि उनकी जिंदगी में इंसानी दखल कम हुआ तो वे खुश होकर गुनगुना रहे हैं।

घरों की मुंडेर पर कई तरह की नन्ही चिड़िया फुदक रहीं हैं। वन्य वन्य जीव सलाहकार जीएस खुशरिया बताते हैं कि इंसान का कोलाहल कम होने से इन पंछियों की आवाज के साथ ही मूवमेंट भी बढ़ गया है। वे पहले भी यहीं रहते थे लेकिन इंसान के कोलाहल के कारण वे चुप रहते हैं। डरे रहते हैं।

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World earth day: Birds and animals returned to city amid lockdown in meerut
nature photography, birds - फोटो : amar ujala
वे बताते हैं कि इसको आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि मेरठ में ही कई इलाकों में दिन में ट्रेन की आवाज नहीं आती है। क्योंकि इतना शोर रहता है कि वो सुनाई नहीं देती।

ऐसे ही पंछियों की आवाज कहां सुनाई देगी। जीएस खुशारिया कहते हैं कि हमको इससे सबक लेना चाहिए। पृथ्वी जितनी हमारी है उतनी ही इन जीव-जंतुओं की है।
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nature photography, birds - फोटो : amar ujala
पर्यावरण बचाने के लिए सबसे जरूरी है कि हम पहले पर्यावरण के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानें। धरा दिवस पर्यावरण के बारे में ज्यादा सीखने तथा जानने के लिए आजकल का यह बहुत अनुकूल समय है।

हम किस तरह से पर्यावरण को संरक्षित रख सकते हैं। अधिक से अधिक पौधे लगाएं। प्रदूषण फैलाने से रोकें। छोटे पंछियों के लिए बिल्डिंग सबसे घातक हो गई हैं। ऐसे में लोगों को चाहिए कि छोटे पंछियों के लिए छत और बालकनी में खाने के लिए कंगनी, किनकी चावल और बाजरा डालें।
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