विधानसभा चुनाव में मेरठ जनपद की सातों सीटों पर चुनाव लड़े 81 प्रत्याशियों में से बसपा और कांग्रेस समेत 66 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। इनमें से कोई भी जमानत जब्त होने से बचाने के लिए कुल वोट का छठा हिस्सा पाने में कामयाब नहीं हो सके।
हस्तिनापुर विधानसभा पर जमानत बचाने के लिए प्रत्याशियों को कम से कम 37,863 वोटों की जरूरत थी, लेकिन गठबंधन और भाजपा प्रत्याशी के अलावा यहां लड़ रहे बाकी छह प्रत्याशी जरूरी वोट नहीं पा सके। सिवालखास सीट पर दस प्रत्याशी 38,520 वोट नहीं पा सके। मेरठ दक्षिण सीट पर नौ प्रत्याशी जरूरी 49,511 वोट नहीं पा सके।
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मतगणना।
- फोटो : amar ujala
मेरठ शहर सीट पर 10 प्रत्याशी जरूरी 33,483, कैंट सीट के 11 प्रत्याशी जरूरी 40,399, किठौर सीट के 11 प्रत्याशी जरूरी 42,131 और सरधना सीट के नौ प्रत्याशी जरूरी 40,334 वोट नहीं पाने के चलते जमानत जब्त करवा बैठे। बसपा और कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियों के प्रत्याशी भी जमानत नहीं बचा सके।
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मतगणना।
- फोटो : amar ujala
तीन सीटों पर औवेसी की पार्टी से भी हारे कांग्रेस प्रत्याशी
इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। मेरठ में 37 वर्ष का सूखा खत्म करने के लिए कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने हस्तिनापुर से लेकर मवाना तक रोड शो किया था। इसके बावजूद भी कांग्रेस की हस्तिनापुर प्रत्याशी अर्चना गौतम ने मात्र 1519 वोट प्राप्त की। वह औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम के प्रत्याशी विनोद कुमार से भी हार गईं। विनोद कुमार ने 4290 वोट प्राप्त की।
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प्रियंका गांधी के साथ अर्चना गौतम
- फोटो : Twitter : @archanagautamm
इसके अलावा कांग्रेस के प्रत्याशी किठौर, सिवालखास, हस्तिनापुर में औवेसी की पार्टी से हार गए। वहीं, शहर और सरधना विधानसभा में भी कांग्रेस और एआईएमआईएम के प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला रहा।
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 1985 में कांग्रेस ने जिले की सात में से पांच सीटों पर कब्जा जमाया था। इसमें सिवालखास पर नानक चंद, खरखौदा में राजेंद्र शर्मा, मेरठ में जयनारायण शर्मा, कैंट में अजीत सेठी और हस्तिनापुर में हरशरण सिंह ने जीत हासिल की थी। अब इन सभी सीटों पर बेहद शर्मनाक प्रदर्शन कांग्रेस का रहा है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अवनीश काजला भी कैंट विधानसभा सीट से मात्र 5096 वोट ही प्राप्त कर सके।