पश्चिमी यूपी में कई दिनों से कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। जनमानस से लेकर पशु-पक्षी तक कांप रहे हैं, लेकिन गोशालाओं में रखे गए गोवंशों को ठंड से बचाने के लिए कोई अतिरिक्त उपाय नहीं किए गए। जो कुछ दान में मिल गया उसी के दम पर कुछ व्यवस्थाएं कर ली गईं। शासन से कोई अतिरिक्त बजट नहीं मिलने से कहीं पर टाट के बोरे भेज दिए गए तो कहीं पर थोड़ा-बहुत गुड़ उपलब्ध हो गया। ऊपर से ठंडी टिन की चादर और नीचे खाली जमीन पर गोवंश ठिठुर रहे हैं।
यूपी: गोशालाओं की व्यवस्थाएं बदहाल, टाट न तिरपाल, ठंड में कांप रहे गोवंश, संरक्षण के दावे फेल
- गोशालाओं में रखे गोवंशों को ठंड से बचाने के लिए अलग से नहीं दिया बजट
- ऊपर से टिन की चादर और नीचे खाली जमीन पर बैठकर ठिठुर रहे गोवंश
अमर उजाला ने जनपद में कई आश्रय स्थलों का जायजा लिया, लेकिन ज्यादातर पर हालात खराब ही मिले। जनपद में दो वृहद गो संरक्षण केंद्र और 26 आश्रय स्थल हैं। इनमें 3511 गोवंशों को रखा गया है। इनमें से ज्यादातर वृद्ध एवं बीमार गोवंश हैं।
मुख्यमंत्री ने गोवंशों को ओढ़ाने के लिए टाट के बोरे तथा खिलाने के लिए गुड़ की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके लिए अलग से कोई बजट नहीं मिला। पशु चिकित्सा विभाग एवं गोशालाओं का संचालन कर रहे लोगों ने राशन डीलरों से दान में बोरे लेकर कुछ आश्रय स्थलों में भेजे हैं। इससे कुछ पशुओं को ओढ़ाने के लिए बोरे मिल गए, जबकि ज्यादातर ऐसे ही रहते हैं। इसके अलावा कुछ लोगों ने दान में गुड़ दे दिया तो पशुओं को खिला दिया अन्यथा अलग से कोई व्यवस्था नहीं है।
गोशाला में 20 पशु, तिरपाल भी नहीं लगा
बाबरी। क्षेत्र के गांव भंदोड़ा में अस्थाई गोशाला में 20 पशु हैं। इन्हें रात में टिन शेड में रखा जाता है, जिसके चारों ओर तिरपाल भी नहीं लगा है। ठंड में जमीन पर बिना पराली और पत्ती के ही बैठते हैं। ग्राम प्रधान अमित शर्मा ने बताया कि उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। मंगलवार को सभी गोवंशों को शामली गोशाला में शिफ्ट कराया जाएगा। पशुओं को ना तो गुड़ मिल रहा है और न ही उन्हें ओढ़ाने के लिए टाट के बोरे हैं।
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पशुओं के लिए टाट के बोरे का बंदोबस्त भी नहीं
चौसाना। गांव दथेड़ा में चल रही गोशाला में पशुओं को ठंड से बचाव के लिए कोई अतिरिक्त बंदोबस्त नहीं हैं। टिन शेड में पशु रात में रहते हैं, जबकि दिन में खुले में घूमते हैं। चारे के रूप में भूसा और पराली दी जा रही है। गोशाला में कुल 52 पशु हैं। उनके लिए टाट के बोरे और गुड़ की व्यवस्था नहीं है। वहीं, खेड़ी खुशनाम की गोशाला 75 गोवंश हैं। सभी पशु टिन शेड के नीचे बांधे जाते हैं। चारे में अगोला व पराली दी जा रही है। गुड़ की व्यवस्था भी नहीं है।
हवा रोकने को लगे हैं जूट एवं प्लास्टिक के बोरे
ऊन नगर पंचायत ऊन में संचालित गोशाला में 68 गोवंश है। यहां पर साफ-सफाई की स्थिति ठीक मिली और गोवंशों को राशन में खल, चोकर, चना छिलका, गुड़, चना चूरी दिया जा रहा है। यहां हरे चारे की व्यवस्था नहीं है। गोशाला की देखभाल के लिए चार कर्मचारी राकेश, सत्येंद्र कुमार, बालकराम, राजीव लगे हैं। कर्मचारियों ने बताया कि पशुओं को सर्दी से बचाव के लिए जूट व प्लास्टिक के बोरे चारों ओर लगाए गए हैं।