वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते देश में लॉकडाउन 5.0 और अनलॉक-1 के बीच सोमवार से जीवन को फिर से पटरी पर लाने की शुरुआत हो गई। केंद्र सरकार द्वारा घोषित अनलॉक-1 के पहले चरण के तहत पश्चिमी यूपी के जिलों में सोमवार से सभी धार्मिक स्थल खोल दिए गए हैं। खास बात यह है कि इस दौरान सुरक्षा के लिहाज से सभी धार्मिक स्थलों पर दिशा-निर्देशों का पालन किया गया। आइए आपको दिखाते हैं पश्चिमी यूपी के छह जिलों की 15 तस्वीरें-
अनलॉक-1: खुल गए मंदिरों के कपाट, यहां देखें- पश्चिमी यूपी के छह जिलों की 15 तस्वीरें
मेरठ में प्रशासन द्वारा अभी धार्मिक स्थल, रेस्तरां, मॉल, सिनेमाहाल के खोलने अनुमति नहीं दी गई है। धार्मिक स्थल सहित इन सभी को खोलने के लिए सोमवार यानी आज कार्यपालक कमेटी फैसला लेगी। मेरठ के अलावा मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली और बिजनौर जनपद में मंदिरों के कपाट खुल गए हैं।
संक्रमण को रोकने के लिए पिछले ढाई माह से जनपद लॉकडाउन के तहत बंदी को झेल रहा है। जिसमें व्यापारिक गतिविधियां बंद हैं। लेकिन अब धीरे-धीरे सभी खुलने की तरफ जा रहा है। अनलॉक-1 के तहत जिला प्रशासन ने जहां पहले देहात क्षेत्र के कस्बों को खोला तो अब महानगर के ग्रीन जोन में आ चुके बाजार खोलने का आदेश जारी किया है। साथ ही संपूर्ण लॉकडाउन जो कि सोमवार और बृहस्पतिवार को होता था, वह भी समाप्त कर दिया है।
सहारनपुर में अनलॉक-1 के तहत सोमवार से बंदिशों के साथ धार्मिक स्थलों पर पूजा पाठ की अनुमति मिल गई है। उधर, बेहट के सिद्धपीठ में दर्शन के लिए मां शाकंभरी देवी मंदिर के कपाट सोमवार को दोपहर के बाद खोल दिए गए। लेकिन प्रशासन द्वारा अभी आरती की अनुमति नहीं दी गई है। मंदिर व्यवस्थापक राणा आदित्य प्रताप सिंह का कहना है कि प्रशासन ने एक नई औपचारिकता पूरी करने के लिए कहा है।
वहीं एसडीएम दीप्ति देव का कहना है कि रात में ही जिला प्रशासन से सूचना मिली थी कि मंदिर व्यवस्थापक को लिखित में एक प्रार्थना पत्र जिलाधिकारी को देना होगा, जिसके बाद वे पुनः सिद्धपीठ का निरीक्षण करेंगे। वहीं निरीक्षण के बाद मंदिर के कपाट खोल दिए गए।
वहीं जिले के अन्य धार्मिक स्थलों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, सैनिटाइज और थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। हालांकि जिले में जामा मस्जिद सहित अधिकतर मस्जिदें खोलने से इनकार कर दिया गया है। दलील दी गई है कि केवल पांच लोगों की अनुमति का औचित्य नहीं है। इससे तो मस्जिद में आगंतुकों के साथ विवाद बढ़ सकता है।