यूक्रेन में एमबीबीएस करने गए मेरठ जिले के छात्र-छात्राओं के सकुशल वतन वापसी का सिलसिला तेजी से चल रहा है। बम धमाकों के बीच बंकरों से निकल कर घर पहुंचते ही माइनस-6 डिग्री तापमान में भूखे प्यासे पैदल चलने की थकान छूमंतर हो गई। अभी कई लाडले रास्ते में है, अगले दो-तीन दिन में जिले के अधिकांश बेटे-बेटियों के पहुंचने की उम्मीद है।
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बुड़ापेस्ट में इंतजार कर रहा विधु यादव
रोहटा रोड निवासी विधु यादव दो दिन से बुड़ापेस्ट में वापसी का इंतजार कर रहा है। विधु ने बताया कि यहां भारतीय दूतावास ने छात्रों को रहने और खाने-पीने की सुविधा दे रखी है। लेकिन अभी तक उनके पास वतन वापसी का मैसेज नहीं आया है। उनके साथ ही बाकी छात्र भी एंबेसी के मैसेज का इंतजार कर रहे हैं। पहले कीव और खारकीव में पढ़ रहे छात्रों को वापस लाया जा रहा है।
मुश्किलों के बाद स्वदेश लौटे उजैर, परिजनों को मिली राहत
हापुड़ रोड भवानी नगर निवासी उजैर शुक्रवार दोपहर स्वदेश पहुंचे। बेटे को देख परिजनों ने राहत की सांस ली। उजैर ने बताया कि वह हंगरी से सुबह 4:30 बजे भारत के लिए फ्लाइट से निकले थे और दोपहर 2:30 बजे वह एयरपोर्ट पहुंचे। यूक्रेन के कीव शहर में एमबीबीएस कर रहे उजैर ने बताया कि कीव में भारतीय दूतावास से उम्मीद के अनुरूप मदद नहीं मिली। कई बार दूतावास के अधिकारियो से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अपने साथियों के साथ खुद ही शहर छोड़ना पड़ा। कीव से ट्रेन का सफर करके लवीब पहुंचे और वहां से बस के जरिये हंगरी बॉर्डर गए। बॉर्डर पार करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। घंटो बॉर्डर पर बिताने के बाद देश में प्रवेश मिला, इसके बाद बॉर्डर से ट्रेन के जरिए बुडापेस्ट पहुंचे।
देर रात देश लौटीं काजल और मानसी
रोहटा रोड निवासी काजल वर्मा और कंकरखेड़ा निवासी मानसी चौधरी रोमानिया से देर रात पहुंच गए। काजल के पिता विनोद वर्मा ने बताया कि शुक्रवार सुबह 11 बजे बेटी विमान में बैठ गई थी। इसके बाद देर रात भारत पहुंची। दोनो ही छात्राएं लवीब से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थी। काफी मुश्किलें झेलते हुए रोमानियां पहुंची। जहां तीन दिन शेल्टर होम में बिताने के बाद भारत के लिए रवाना हुईं। बेटियों को देखकर परिवार के लोगों के खुशी के आंसु छलक पड़े।
खारकीव से दिल्ली पहुंच गई मानसी, आज आएंगी मेरठ
यूक्रेन और रुस के बीच चल रहे युद्ध में मेरठ के कई बच्चे खारकीव में फंसे रहे। इसमें दिल्ली रोड स्थित सूर्यपुरम निवासी मानसी शर्मा भी खारकीव में फंसी रही। हालांकि, शुक्रवार दोपहर 1.30 बजे वह दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर पहुंचीं। मानसी अपनी साथी छात्राओं के साथ पौलेंड बॉर्डर पर पहुंच गई थी। यहां से उन्हें दिल्ली के लिए रवाना किया गया। वह खारकीव से एमबीबीएस कर रही हैं। उनके पिता सुनीत शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को वह दिल्ली में परिचित के यहां रुक गईं है। शनिवार को मेरठ से दिल्ली जाकर मानसी को मेरठ लाया जाएगा।