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यूक्रेन से घर पहुंचे लाल: लाडलों का चेहरा देख छलके आंसू, बमबारी से 500 मीटर की दूरी पर था शान मोहम्मद, दर्दभरी हैं छात्रों की कहानियां

Sat, 05 Mar 2022 02:21 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 05 Mar 2022 02:21 PM IST
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Ukraine latest news: students of MBBS have reached at home in Meerut from Ukraine read full story
घर पहुंचे छात्र। - फोटो : amar ujala

यूक्रेन में एमबीबीएस करने गए मेरठ जिले के छात्र-छात्राओं के सकुशल वतन वापसी का सिलसिला तेजी से चल रहा है। बम धमाकों के बीच बंकरों से निकल कर घर पहुंचते ही माइनस-6 डिग्री तापमान में भूखे प्यासे पैदल चलने की थकान छूमंतर हो गई। अभी कई लाडले रास्ते में है, अगले दो-तीन दिन में जिले के अधिकांश बेटे-बेटियों के पहुंचने की उम्मीद है।



यूक्रेन की राजधानी कीव की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रही इंद्रप्रस्थ एस्टेट निवासी श्रुति मलिक शुक्रवार को घर पहुंच गई। उनके पिता राजेश मलिक और माता सुरक्षा मलिक उसे हिंडन एयरबेस लेने गए थे। श्रुति मलिक को देखकर माता-पिता की आंखें छलक आईं और काफी देर तक श्रुति मलिक अपने माता-पिता के गले लगकर भावुक हो गई। श्रुति ने बताया कि 25 फरवरी को कीव में कर्फ्यू लगा दिया था। 28 फरवरी को कर्फ्यू को हटाकर वहां से सभी को पश्चिमी बॉर्डर की तरफ सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा था। वह उसी दिन वहां से निकल गई थी लेकिन, ट्रेनों में भारी भीड़ होने से बैठ नहीं सकी थी। काफी मशक्त के बाद एक ट्रेन में चढ़ी और 17 घंटे की यात्रा के बाद हंगरी बॉर्डर पहुंची। यहां पर भारतीय दूतावास के लोगों ने उन्हें सहायता उपलब्ध कराई ट्रेन से हंगरी की राजधानी बुड़ापेस्ट पहुंचाया। श्रुति के पिता राजेश मलिक ने कहा कि बेटी के सकुशल घर पहुंचने पर बहुत बड़ी राहत मिली है। सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने भी दोपहर में घर पहुंचकर श्रुति का हाल जाना। उनके साथ भाजपा नेता विवेक रस्तोगी और रवीश अग्रवाल भी थे। 

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यूक्रेन में फंसे मेरठ के छात्र। - फोटो : amar ujala

बुड़ापेस्ट में इंतजार कर रहा विधु यादव 
रोहटा रोड निवासी विधु यादव दो दिन से बुड़ापेस्ट में वापसी का इंतजार कर रहा है। विधु ने बताया कि यहां भारतीय दूतावास ने छात्रों को रहने और खाने-पीने की सुविधा दे रखी है। लेकिन अभी तक उनके पास वतन वापसी का मैसेज नहीं आया है। उनके साथ ही बाकी छात्र भी एंबेसी के मैसेज का इंतजार कर रहे हैं। पहले कीव और खारकीव में पढ़ रहे छात्रों को वापस लाया जा रहा है।

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यूक्रेन में हो रहे धमाके। - फोटो : amar ujala

मुश्किलों के बाद स्वदेश लौटे उजैर, परिजनों को मिली राहत
हापुड़ रोड भवानी नगर निवासी उजैर शुक्रवार दोपहर स्वदेश पहुंचे। बेटे को देख परिजनों ने राहत की सांस ली। उजैर ने बताया कि वह हंगरी से सुबह 4:30 बजे भारत के लिए फ्लाइट से निकले थे और दोपहर 2:30 बजे वह एयरपोर्ट पहुंचे। यूक्रेन के कीव शहर में एमबीबीएस कर रहे उजैर ने बताया कि कीव में भारतीय दूतावास से उम्मीद के अनुरूप मदद नहीं मिली। कई बार दूतावास के अधिकारियो से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अपने साथियों के साथ खुद ही शहर छोड़ना पड़ा। कीव से ट्रेन का सफर करके लवीब पहुंचे और वहां से बस के जरिये हंगरी बॉर्डर गए। बॉर्डर पार करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। घंटो बॉर्डर पर बिताने के बाद देश में प्रवेश मिला, इसके बाद बॉर्डर से ट्रेन के जरिए बुडापेस्ट पहुंचे।

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यूक्रेन के हालात। - फोटो : amar ujala

देर रात देश लौटीं काजल और मानसी
रोहटा रोड निवासी काजल वर्मा और कंकरखेड़ा निवासी मानसी चौधरी रोमानिया से देर रात पहुंच गए। काजल के पिता विनोद वर्मा ने बताया कि शुक्रवार सुबह 11 बजे बेटी विमान में बैठ गई थी। इसके बाद देर रात भारत पहुंची। दोनो ही छात्राएं लवीब से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थी। काफी मुश्किलें झेलते हुए रोमानियां पहुंची। जहां तीन दिन शेल्टर होम में बिताने के बाद भारत के लिए रवाना हुईं। बेटियों को देखकर परिवार के लोगों के खुशी के आंसु छलक पड़े।

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यूक्रेन के हालात। - फोटो : amar ujala

खारकीव से दिल्ली पहुंच गई मानसी, आज आएंगी मेरठ
यूक्रेन और रुस के बीच चल रहे युद्ध में मेरठ के कई बच्चे खारकीव में फंसे रहे। इसमें दिल्ली रोड स्थित सूर्यपुरम निवासी मानसी शर्मा भी खारकीव में फंसी रही। हालांकि, शुक्रवार दोपहर 1.30 बजे वह दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर पहुंचीं। मानसी अपनी साथी छात्राओं के साथ पौलेंड बॉर्डर पर पहुंच गई थी। यहां से उन्हें दिल्ली के लिए रवाना किया गया। वह खारकीव से एमबीबीएस कर रही हैं। उनके पिता सुनीत शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को वह दिल्ली में परिचित के यहां रुक गईं है। शनिवार को मेरठ से दिल्ली जाकर मानसी को मेरठ लाया जाएगा।

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