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Kanwar Yatra 2025: कांवड़ में दादी को बैठाकर ले जा रहे 'कलयुग के श्रवण', एक तरफ गंगाजल और दूसरी ओर सेवा भाव

Fri, 11 Jul 2025 02:07 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: डिंपल सिरोही Updated Fri, 11 Jul 2025 02:07 PM IST
सार

हरियाणा के दो पोते विशाल और जतिन अपनी 70 वर्षीय दादी को पालकी में बैठाकर हरिद्वार से बहादुरगढ़ तक कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। एक तरफ दादी, दूसरी तरफ गंगाजल... यह संतुलन देखकर हर कोई कह रहा है- ऐसे पोते सबको मिलें।

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Shravan Kumar of Kalyug: Grandsons Carry Grandmother in Palki with Equal Weight of GangaJal
पालकी कांवड़ - फोटो : अमर उजाला

सावन माह की कांवड़ यात्रा में अद्भुत नजारे देखने को मिल रहे हैं। शिव भक्त कांवड़िये तीर्थनगरी हरिद्वार से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए अपनी कांवड़ में पवित्र गंगा जल भरकर ला रहे हैं। इसी कड़ी में बड़ौत-बुढ़ाना कांवड़ मार्ग से दो शिवभक्त कांवड़िये 'कलयुग के श्रवण' कुमार के रूप में भड़ल गांव में पहुंचे हैं। जिन्होंने पालकी कांवड़ में एक तरफ अपनी 70 वर्षीय बुजुर्ग दादी को बैठाया हुआ है और दूसरी तरफ उनके वजन के बराबर गंगाजल रखकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं। वहीं इस श्रवण कुमार की कांवड़ को देखकर हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है।

Shravan Kumar of Kalyug: Grandsons Carry Grandmother in Palki with Equal Weight of GangaJal
पालकी कांवड़ - फोटो : अमर उजाला

सावन माह की शुरुआत होते ही हरिद्वार से शिवभक्त कांवड़ियों का आवागमन शुरू हो गया है। वहीं शुक्रवार को बड़ौत-बुढ़ाना कांवड़ मार्ग पर अद्भुत नजारे देखने को मिल रहे हैं। कोई कांवड़िया अपने अलग अंदाज में हरिद्वार से कांवड़ ला रहे हैं। वहीं हरियाणा झज्जर जिले के बहादुरगढ़ के रहने वाले कलयुग के श्रवण कुमार बने दो पोते विशाल और जतिन अपनी 70 वर्षीय दादी राजबाला को कंधों पर पालकी में बैठाकर लाए हैं, जिसमें एक तरफ पलड़े में उनकी दादी राजबाला हैं। दूसरी तरफ उनके बराबर गंगाजल है।

Shravan Kumar of Kalyug: Grandsons Carry Grandmother in Palki with Equal Weight of GangaJal
पालकी कांवड़ - फोटो : अमर उजाला

दादी के दोनों पोतों विशाल और जतिन ने बताया है। वह अपनी दादी राजबाला को अपने घर से 21 जून को हरिद्वार लेकर पहुंचे थे। वहां उन्होंने अपनी दादी को तीर्थ स्थल के दर्शन कराए और उसके बाद उन्होंने हर की पैड़ी पर गंगा स्नान कराकर अपनी श्रवण कुमार वाली कांवड़ उठाई थी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष दादी ने अपनी इच्छा जाहिर की थी।

उनकी इच्छा को पूरी करने के लिए दोनों भाइयों ने पिछले वर्ष भी संकल्प लेकर उन्हें यात्रा कराई थी। अबकी बार उनकी यह दूसरी कांवड़ है। उन्होंने बताया जगह-जगह लोग उनका स्वागत भी कर रहे हैं। वहीं हर कोई इन दोनों भाइयों की अपनी दादी के प्रति सेवा भाव देखकर हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है।

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Shravan Kumar of Kalyug: Grandsons Carry Grandmother in Palki with Equal Weight of GangaJal
पालकी कांवड़ - फोटो : अमर उजाला

राजबाला बोलीं- ऐसे पोते सब को दे भगवान
अपने दोनों पोतों विशाल और जतिन के साथ हरिद्वार से बहादुरगढ़ हरियाणा तक पालकी में बैठकर यात्रा कर रहीं राजबाला ने बताया कि इतने लम्बे सफर की यात्रा करा रहे हैं। गर्व है कि मुझे ऐसे पोते मिले हैं। जब इनकी लोग तारीफ करते हैं तो मेरा मन बहुत खुश होता है। भगवान ऐसे पोते सभी को दें।

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Shravan Kumar of Kalyug: Grandsons Carry Grandmother in Palki with Equal Weight of GangaJal
पालकी कांवड़ - फोटो : अमर उजाला

दादी ने ही बचपन से पालन पोषण कर इस लायक बनाया 
हरिद्वार से अपनी दादी को पालकी कांवड़ में अपनी दादी को कांवड़ यात्रा करा रहे विशाल ने बताया कि उनके पिता अनिल कुमार अयोध्या में रहते हैं और वहीं नौकरी करते हैं।

विशाल ने दसवीं की पढ़ाई की, उसके बाद वह कपड़े का काम करते हैं। आत्मनिर्भर होने के बाद वह अपनी दादी की हर इच्छा को पूरा कर रहे हैं। उन्होंने बताया बचपन से उनकी दादी ने उनका पालन पोषण कर इस काबिल बनाया है। अब हमारा फर्ज है कि हम उनकी हर इच्छा पूरी करें और उनकी सेवा करें।

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