शामली के जलालाबाद में पकड़े गए म्यांमार के मूल निवासी अब्दुल मजीद से पूछताछ में कई चौंकाने वाली बात सामने आई हैं। वह करीब 18 साल पहले भारत में अपने पिता और भाई के साथ घुसा था। तब से वह फर्जी तरीके से देश में रह रहा था। देश के कई राज्यों में इधर से उधर घूमता रहा और किसी की पकड़ में नहीं आया। कुछ दिन पूर्व भाई से हुए विवाद के बाद उसके विदेशी होने की पोल खुली...
अठारह साल पहले बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुसा था अब्दुल मजीद, विवाद ने खोली विदेशी होने की पोल
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दो साल पहले भी हिरासत में लिए थे दो छात्र
मदरसा मिफ्ता-उल-उलूम में जनवरी 2017 में दो छात्रों को संदिग्ध गतिविधियों के चलते एटीएस की टीम ने उठाया था। हालांकि, पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था। उस समय भी छात्रों के पकड़े जाने पर मदरसा चर्चा में रहा था।
रविवार रात को चार छात्रों के पकड़े जाने से मदरसा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस बार छात्र के साथ मदरसे के संचालक हफीयुल्ला खान को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। कस्बे में मदरसे को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। लोगों का कहना है कि अगर दो साल पहले छात्रों के पकड़े जाने की घटना से सबक लिया होता तो मदरसा संचालक को आज यह दिन देखना नहीं पड़ता।
आपसी विवाद से खुला विदेशी होने का भेद
मदरसे के निकट खुशनुमा कॉलोनी में रहने वाले अब्दुल मजीद और नोमान के बीच चार दिन पहले आपसी विवाद न होता तो शायद उनके विदेशी होने का पता नहीं चल पाता। दोनों के बीच किसी बात को लेकर हुए विवाद में एक ने पुलिस को सूचना दी थी। पूछताछ में उनके म्यांमार का होने का पता चला था।
इसके बाद पुलिस और खुफिया विभाग की टीमें सक्रिय हुई, जिस पर यह बड़ा मामला खुलकर सामने आया। इस मामले का खुलासा होने पर पुलिस और खुफिया विभाग गुडवर्क बताकर पीठ थपथपाने में लगे है। हालांकि, एसपी अजय कुमार का कहना है कि चार दिन पहले अब्दुल मजीद और नोमान के बीच विवाद होने और उन्हें थाने लाकर पूछताछ करने का मामला उनकी जानकारी में आया है।