फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Saharanpur Mosque Demolition: SP MP Iqra Hasan House Arrested Tension Escalates After Action

सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद गिराने पर तनाव: सपा सांसद इकरा हाउस अरेस्ट, ध्वस्तीकरण पर मायावती ने कही ये बात

Sat, 05 Sep 2026 09:33 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर Published by: Sharukh Khan Updated Sat, 05 Sep 2026 09:33 AM IST
सार

सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। इसके साथ ही कलेक्ट्रेट परिसर के पांचों गेट सील किए गए हैं। किसी भी बाहरी व्यक्ति को एंट्री नहीं दी गई है। वहीं, कैराना से सपा सांसद इकरा हसन को हाउस अरेस्ट किया गया है। यूपी पुलिस ने इकरा को सहारनपुर जाने से रोक दिया है।

विज्ञापन
Saharanpur Mosque Demolition: SP MP Iqra Hasan House Arrested Tension Escalates After Action
iqra hasan house arrest - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार सुबह कलेक्ट्रेट में बनी मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। प्रशासन के अनुसार, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध घोषित किया था। मस्जिद समिति की पहली अपील भी खारिज हो चुकी थी। इस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और आरआरएफ बल तैनात रहा। मस्जिद गिराने के बाद तनाव बढ़ गया है। कैराना सांसद इकरा हसन को भी हाउस अरेस्ट किया गया है।
विज्ञापन


सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद पर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था। शनिवार सुबह प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर मस्जिद पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। 
विज्ञापन




 

अधिकारियों ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में सुनवाई के दौरान मस्जिद का निर्माण अवैध पाया गया था। यह निर्माण सरकारी जमीन पर किया गया था। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति ने अपील की थी। हालांकि, वह अपील भी खारिज हो गई और सिटी मजिस्ट्रेट का मूल आदेश बरकरार रखा गया। प्रशासन ने कार्रवाई से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने का दावा किया है।

 

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले ही सहारनपुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। त्योहारों को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल के साथ पांच कंपनी पीएसी और आरआरएफ तैनात की गई। मिश्रित आबादी वाले इलाकों में लगातार फुट पेट्रोलिंग और फ्लैग मार्च किया गया। 

 
विज्ञापन

सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि नोटिस और अपील सहित निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण हुआ। उन्होंने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए थे।

सांसद इकरा हसन को हाउस अरेस्ट
इस कार्रवाई के बीच कैराना से सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया। वह सहारनपुर जाने के लिए निकल रहीं थीं। इसी दौरान उनके आवास पर बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंचा और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया। 

 

इकरा हसन ने कहा कि वह सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले पर अधिकारियों से मिलना चाहती थीं। वह इलाके की जनता की आवाज प्रशासन के सामने रखना चाहती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए घर पर ही नजरबंद किया गया है।

 

सांसद इकरा हसन ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधि का जनता से जुड़े मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना अपराध है। इकरा हसन ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाने के लिए चुने जाते हैं। उन्हें रोककर उस आवाज को दबाया नहीं जा सकता। 

24 मार्च 2025 को दाखिल हुई थी याचिका
मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत शिकायत के बाद हुई। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने मस्जिद के संबंध में शिकायत की थी। इसके बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पीपी एक्ट के तहत याचिका दाखिल की गई।



 

सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को अवैध करार दिया था
16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को अवैध करार देते हुए 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद पक्ष की ओर से 20 जुलाई 2026 को जिला जज की अदालत में याचिका दाखिल की गई।

 

17 तारीखों की सुनवाई के बाद 2 सितंबर को फैसला
जिला जज की अदालत में मामले की 17 तारीखों पर सुनवाई हुई। इसके बाद दो सितंबर को अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की।
 

सहारनपुर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब बहुजन समाज पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस मामले को लेकर एक्स पर पोस्ट की है। मायावती ने प्रदेश में मस्जिदों को अवैध बताकर ध्वस्त किए जाने के कथित सरकारी अभियान पर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की है।

'मस्जिदों को ध्वस्त करने का अभियान ठीक नहीं'
मायावती ने अपनी पोस्ट में कहा कि सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में मस्जिदों को जल्दबाजी में अवैध बताकर ध्वस्त करने का सरकारी अभियान उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से ऐसे नकारात्मक हालात से बचने के लिए अभियान पर तत्काल रोक लगाने और समस्या के समाधान के दूसरे उपाय तलाशने की अपील की।

'सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों का सम्मान जरूरी'
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि संवैधानिक और सेक्युलर सरकार का दायित्व है कि वह सभी धर्मों को मानने वाले लोगों और उनके धार्मिक स्थलों का समान रूप से सम्मान और सुरक्षा करे। उन्होंने मस्जिदों को इस्लाम में इबादत और सामूहिक नमाज का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए भारतीय परंपरा के अनुसार उनके सम्मान को देश और व्यापक जनहित में जरूरी बताया।

 

मकान गिराने की कार्रवाई पर भी सवाल
मायावती ने अपने पोस्ट में बिना नियम-कानून का समुचित पालन किए अभियुक्तों के मकान ध्वस्त करने की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई में पूरे परिवार को सामूहिक रूप से सजा देकर बेघर कर दिया जाता है, जिससे लोग काफी विचलित हैं।

 

'कानून द्वारा कानून का राज' जरूरी
मायावती ने कहा कि ऐसे हालात में उनकी पार्टी की सरकार की तरह 'कानून द्वारा कानून का राज' वाला व्यवहार जरूरी है। उन्होंने सरकार के साथ-साथ न्यायालय से भी इस दिशा में समुचित ध्यान देने की अपील की।

 

सौहार्द बनाए रखने की अपील
मायावती ने अपनी पोस्ट के अंत में लोगों से सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सभी पक्षों को शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए।

मस्जिद ध्वस्तीकरण पर भड़के इमरान मसूद
सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण का मामला अब सियासी और कानूनी विवाद में बदलता नजर आ रहा है। मस्जिद गिराए जाने के बाद कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि तमाम दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने के बावजूद मस्जिद को गिरा दिया गया। उनके मुताबिक यह सिर्फ मस्जिद का मामला नहीं, बल्कि संविधान में दिए गए अधिकारों का सवाल है।

 

मस्जिद की मिल्कियत को लेकर किया दावा
इमरान मसूद ने दावा किया कि संबंधित मस्जिद 1911 से पहले की है और आज भी इसके मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि मस्जिद की मिल्कियत वहीद खान और याकूब खान के नाम बताई गई है। उनका आरोप है कि प्रशासन को तमाम जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद कार्रवाई की गई।

 

सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर उठाए सवाल
बयान में सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश का भी जिक्र किया गया। नेता के मुताबिक आदेश में 30 दिन का समय दिया गया था, लेकिन 24 तारीख को इस मामले में स्टे हो गया था और करीब 22 दिन की अवधि अभी बाकी थी। इसके बावजूद मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।

वक्फ को पार्टी नहीं बनाने का आरोप
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान वक्फ से जुड़े कानूनी प्रावधानों का भी ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि वक्फ को मामले में पार्टी नहीं बनाया गया। उन्होंने वक्फ-ए-यूजर समेत अन्य कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए दावा किया कि इन पहलुओं की भी अनदेखी की गई।

 

'खसरा मौजूदा स्थिति बताता है'
बयान में जमीन के खसरा रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाया गया। इमरान मसूद ने कहा कि खसरा केवल जमीन की मौजूदा स्थिति बताता है और उसके आधार पर मालिकाना हक पूरी तरह साबित नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी आधार पर जमीन को लेकर प्रशासनिक निष्कर्ष निकाला गया।

 

रात में कार्रवाई का आरोप
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि रातों-रात पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया गया। उनका दावा है कि लोगों को घरों में रहने के लिए मजबूर किया गया और इसी दौरान मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि मौके पर पार्टी के नेता और एमएलसी भी मौजूद थे और पूरी रात इलाके में स्थिति पर नजर रखते रहे।

 

'हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे'
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जहां तक जरूरत होगी, वहां तक कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कार्रवाई को संविधान और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक स्थल का मामला नहीं है।

 

'आज हमारे लिए, कल दूसरों के लिए'
बयान में उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक स्थल के गिराए जाने से किसी भी समुदाय के व्यक्ति को खुश नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे सहारनपुर के लोगों के लिए 'काला दिन' बताते हुए कहा कि अगर आज किसी एक समुदाय के धार्मिक स्थल के साथ ऐसा होता है तो भविष्य में यही कार्रवाई दूसरों के खिलाफ भी हो सकती है।

शाहनवाज खान बोले-जब शहर सो रहा था, तब मस्जिद ध्वस्त कर दी
एमएलसी शाहनवाज खान ने कहा कि जब पूरा शहर सो रहा था, तब मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इतने साल पुरानी मस्जिद पर किसी को आपत्ति नहीं थी और अचानक एक फैसले में उसे अवैध बताया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी क्या जल्दी थी कि रात में ही कार्रवाई करनी पड़ी।

शाहनवाज खान ने कहा कि सभी को उच्च अदालत में जाने का अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि रात में जिलाधिकारी की ओर से ध्वस्तीकरण नहीं किए जाने का आश्वासन मिला था, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई की गई।

'2027 के चुनाव को देखते हुए कार्रवाई' का आरोप
एमएलसी शाहनवाज खान ने आरोप लगाया कि पूरी कार्रवाई 2027 के चुनाव को देखते हुए की जा रही है। उन्होंने शहर के बुद्धिजीवी लोगों से चुप न रहने और इस घटनाक्रम पर विचार करने की अपील की। हालांकि उन्होंने कहा कि वह कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि मस्जिद की पैरवी करने वाले लोग मामले को लेकर हाईकोर्ट जाएंगे।

अखिलेश बोले- दूसरों की आस्था का सम्मान करने वाला ही सच्चा सनातनी
सहारनपुर में अवैध मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करते, वे सच्चे सनातनी नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि दूसरों की आस्था से खिलवाड़ करना सनातन धर्म की भावना के विपरीत है। अखिलेश ने कहा कि सच्चा हिंदू कभी दूसरों का अपमान नहीं करता। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन धर्म हमें पूरी धरती और समाज को एक परिवार मानने की सीख देता है।

औवैसी बोले-1911 के दस्तावेज के बावजूद क्यों चला बुलडोजर?
सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को शनिवार सुबह पांच बजे ध्वस्त किए जाने के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। ओवैसी ने पूछा कि क्या अब मुसलमानों के लिए मजहबी आजादी का संवैधानिक अधिकार भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि इबादतगाहों पर बार-बार कमजोर और मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोजर क्यों चलाया जाता है।

 

1911 के दस्तावेजों का ओवैसी ने किया जिक्र
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मस्जिद कमेटी ने अदालत में 1911 के दस्तावेज पेश किए थे। उनके मुताबिक इन दस्तावेजों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की गई कि मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी। ओवैसी ने कहा कि एक सदी से अधिक समय से वहां लगातार नमाज होती रही है। उन्होंने कहा कि यह कोई हाल में बनाई गई इमारत नहीं थी, बल्कि लंबे समय से इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल होती रही है।

 

वक्फ बाय यूजर और लिमिटेशन एक्ट का हवाला
ओवैसी ने अपने बयान में वक्फ बाय यूजर का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय से किसी स्थान के इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल होने का भी कानूनी महत्व है। उन्होंने  लिमिटेशन एक्ट का हवाला देते हुए सरकार की ओर से जमीन के दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब किसी जमीन पर एक सदी से अधिक समय से खुले तौर पर और लगातार कब्जा रहा हो तो सरकार अचानक उसे नजरअंदाज कर यह नहीं कह सकती कि जमीन अब उसकी है। ओवैसी ने कहा कि इतने लंबे समय की काबिजी को देखते हुए प्रतिकूल कब्जे का सवाल भी उठता है।
 

'मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में'
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा,'मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया।' उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को मस्जिद दिखाई देने पर तकलीफ हो सकती है, लेकिन यह उनका मसला है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि अपनी खुन्नस मिटाने के लिए किसी मस्जिद पर बुलडोजर नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि धार्मिक आजादी किसी की रहम-ओ-करम पर निर्भर नहीं है।

'हमारी इबादतगाहों पर बुलडोजर क्यों?'
ओवैसी ने सवाल उठाया कि अगर किसी धार्मिक स्थल को लेकर विवाद है तो बार-बार इबादतगाहों पर बुलडोजर कार्रवाई क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक आजादी को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सहारनपुर की मस्जिद का मामला सिर्फ एक इमारत का मामला नहीं है, बल्कि इससे मजहबी आजादी और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े सवाल भी उठते हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed