भारतीय सेना में अपने श्वानों और अश्वों की फुर्ती और खूबियों के लिए मशहूर रिमाउंट वेटनरी कोर का 241वां स्थापना दिवस शनिवार को धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस बार का स्थापना दिवस कई मायनों में खास माना जा रहा है। अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में ‘स्टांप लांच’ होने की खबर को प्रकाशित किया था। इस खबर पर भी मुहर लग गई। सेना के क्वार्टर मास्टर जनरल आरवीसी के स्थापना दिवस पर इसे लांच करेंगे।
आरवीसी ने पूरे किए 241 साल, बड़ाखाना में यादें ताजा करेंगे सेना के अफसर, जवान और वेटरंस
इस कार्यक्रम में आरवीसी के डीजी पी.वेंकेटेश भी बतौर अतिथि के तौर पर शिरकत करने पहुंचे। यहां वह आरवीसी के स्टांप का अनावरण करेंगे। इस कार्यक्रम में सेना के कई बड़े अधिकारी भी मौजूद हैं। आयोजन स्थल पर घोड़ों की पुरानी पड़ चुकी सैकड़ों नाल से बनी शानदार आकृति से आरवीसी को अंकित किया गया है।
आरवीसी के फुटबाल मैदान में देशभक्ति पर आधारित सेना के बैंड ने भव्य प्रस्तुति दी। बारिश के कारण श्वान और अश्व शो प्रभावित हुआ। सेना के पूर्व अधिकारियों के लिए 14वां पुनर्मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया है। 11 बजे से शुरू हुए इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
शाम के समय स्टांप का अनावरण और बड़ाखाना का आयोजन किया जाएगा। इस बड़ाखाना में सेना के अफसर, जवान और वेटरंस अपनी यादें ताजा करेंगे। आरवीसी के इतिहास और उप्लब्धियों को भी देखा जाएगा। वहीं आयोजन में शामिल मेहमान जकार्ता में रजत पदक जीतने वाले घुड़सवारों से भी मुलाकात होगी।
- 1779 से है आरवीसी का अस्तित्व।
- 1875 में सहारनपुर में किया गया आर्मी रिमाउंट डिपार्टमेंट का गठन।
- 1920-14 दिसंबर को आर्मी वेटनरी कोर बनाई गई।
- 1950 में रिमाउंट वेटनरी और फार्म कोर गठित हुई।
- 1960 में आरवीसी और मिलिट्री फॉर्म को अलग कर दिया गया।
- 1929 में आरवीसी को पुणे से अंबाला शिफ्ट किया।
- 1948 में 17 अप्रैल को गिलिस्पी लाइन मेरठ में आरवीसी को शिफ्ट किया।
- 1960 में एक मार्च को यहां डॉग ट्रेनिंग फैकल्टी की स्थापना की गई।