पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश होने से क्षेत्रीय नदियों का जलस्तर बढ़ गया। हथिनी कुंड बैराज से यमुना में गुरुवार को 93 हजार 299 क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है। यह पानी आज सुबह 8:00 बजे छोड़ा गया है। वहीं बिजनौर में पिछले 24 घंटे में हथिनीकुंड बैराज से यमुना में छोड़े गए पानी के बाद शामली के कैराना में यमुना का जलस्तर 55 सेंटीमीटर बढ़ गया है।
उफान पर नदियां: हथिनीकुंड बैराज से यमुना में छोड़ा गया 93 हजार 299 क्यूसेक पानी, गंगा का जलस्तर भी बढ़ा
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बिजनौर में भागूवाला क्षेत्र की कोटावाली नदी बुधवार सुबह से ही उफान पर रही। कोटावाली नदी रपटे पर तीन फीट से अधिक पानी चला। पानी के तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने रपटे से वाहनों के गुजरने पर रोक लगा दी। एसडीएम परमानंद झा ने भागूवाला चौकी पुलिस को नदी में पानी के तेज बहाव के दौरान किसी भी वाहन को रपटे से गुजरने की अनुमति नहीं देने को कहा।
पुलिस ने शाम चार बजे तक किसी भी वाहन को नदी रपटे से नहीं गुजरने दिया। घंटों इंतजार कर रहे वाहनों ने फिर भागूवाला-चंदक हेड मार्ग से आवागमन किया। उधर, मंडावली क्षेत्र की सूखा नदी और लकड़ाहन नदी भी उफान पर रही। ग्राम जटपुरा बोंडा के पास लकड़ाहन नदी के रपटे पर पानी आने से करीब तीन घंटे तक यातायात ठप रहा। वहीं, मोटा महादेव-भागूवाला बाईपास मार्ग पर सूखा नदी और लकड़ाहन नदी के रपटे पर पानी के तेज बहाव से कई घंटों तक वाहनों की आवाजाही ठप रही।
गांव में कैद हो जाते हैं पीतमगढ़ के लोग
भागूवाला क्षेत्र के गांव पीतमगढ़ के लोग अपने ही गांव में कैद है। ग्रामीण अशोक कुमार, मुन्ने, पूरन, भोपाल, धर्मपाल का कहना है कि पीतमगढ़ गांव कोटावाली नदी और कोठियारी नदी के बीच बसा है।
गांव से आवाजाही का रास्ता दोनों नदियों से होकर गुजरता है। लेकिन बरसात में दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण अपने गांव में ही कैद होने को मजबूर हो जाते हैं। बुधवार को भी दोनों नदियों को जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की आवाजाही बंद हो गई।
गंगा का जलस्तर एक लाख क्यूसेक के पार, तटबंध टूटने का खतरा बढ़ा
पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश से बुधवार को गंगा का जलस्तर एक लाख क्यूसेक के ऊपर पहुंच गया। हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में गंगा का तटबंध टूटने का खतरा बढ़ गया है। वहीं क्षतिग्रस्त तटबंध को जोड़ने के लिए स्थानीय ग्रामीण शाम तक जुटे रहे।
बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार ने बताया कि बुधवार शाम पांच बजे गंगा का जलस्तर एक लाख 28 हजार क्यूसेक पर चल रहा था। ऐसे में खादर क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ गई है। कई स्थानों से गंगा के कटान के कारण कच्चा तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया है। इसकी मरम्मत में ग्रामीण, नरेगा श्रमिक और कारसेवक लगे हैं। हालांकि के कारण हाल ही में डाली गई मिट्टी तटबंध से बहकर नीचे की ओर जा रही है।
बीते दो दिनों से हो रही बारिश के कारण निचले इलाकों के जंगल जलमग्न हो गए हैं। कई गांव के मुख्य मार्गों पर भी बारिश का पानी भर गया है। खादर क्षेत्र के आसपास के गांव के ग्रामीण लगातार तटबंध की निगरानी कर रहे हैं।