मेरठ में अनुसूचित जाति की बीए की छात्रा के मौत के मामले में कलक्ट्रेट पर जाम और विरोध प्रदर्शन के बाद बृहस्पतिवार को एक फोन का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। फोन एसएसपी के पीआरओ को किया गया। इसमें कॉल करने वाले युवक ने खुद को अधिवक्ता बताकर एसएसपी के सरकारी नंबर पर पीआरओ रमाकांत पचौरी से बात की।
युवक ने फोन पर कहा- पीआरओ साहब...जैसे कप्तान बुधवार को बंदी वाहन में चढ़े थे। एक बार मुझे और कप्तान साहब को बंदी वाहन के अंदर बंद करा दीजिए। फिर देखिए कौन बाहर आता है। पीआरओ ने इस युवक को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि तुम गलत बोल रहे हो, कप्तान को धमकी दे रहे हो।
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हत्याकांड को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर धरना देते व जाम लगाते दलित समाज के लोगो को फ़ोर्स के साथ एसएसपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दरअसल, बुधवार को छात्रा की हत्या के मामले में कलेक्ट्रेट के बाहर तीन घंटे से अधिक समय तक सड़क पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया गया था। अधिकारियों के समझाने के बावजूद प्रदर्शनकारी सड़क से नहीं उठ रहे थे।
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इस दौरान एसएसपी अविनाश पांडेय के नेतृत्व में पुलिस ने लाठी फटकाकर प्रदर्शनकारियों को दौड़ा दिया था। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अधिवक्ता रवि गौतम को एसएसपी ने बंदी वाहन में थप्पड़ मारे थे। पीआरओ रमाकांत पचौरी का कहना है कि कॉल करने वाले युवक की पहचान का प्रयास किया जा रहा है।
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वादी ने प्राथमिकी दर्ज होने के सात दिन बाद दिया लिखित बयान
अनुसूचित जाति की छात्रा का शव 17 मई को थाना रोहटा क्षेत्र से बरामद हुआ था। छात्रा के परिजनों ने 16 मई को थाना टीपीनगर में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसके बाद उसी रात उन्होंने तहरीर देकर अंकुश चौधरी पर शादी का दबाव बनाने और अपहरण कर ले जाने का आरोप लगाया था। पुलिस के अनुसार छात्रा 15 मई को परीक्षा देने गई थी लेकिन नहीं लौटी।
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इसके बाद परिजनों ने अंकुश चौधरी के खिलाफ नामजद तहरीर दी। पुलिस के अनुसार, छात्रा और अंकुश चौधरी निवासी कल्याणपुर दोनों कई साल से परिचित थे। दोनों की बिरादरी अलग-अलग है। पुलिस ने बताया कि केस दर्ज होने के बाद विवेचक ने वादी से बयान देने को कहा।