नमो भारत रैपिड ट्रेन के मेरठ साउथ तक संचालन के बाद अब मेट्रो ने भी शहर में दस्तक दे दी है। रविवार को मेट्रो का ट्रायल रन शुरू हो गया। मेरठ साउथ (भूड़बराल) से मेरठ सेंट्रल स्टेशन (फुटबाल चौराहा) तक 15 किमी. से 40 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से मेट्रो को दौड़ाया गया।
Meerut Metro Trial: मेरठ साउथ से सेंट्रल के बीच ट्रायल शुरू, इन सुविधाओं से है लैस, दुहाई पहुंचे 10 ट्रेनसेट
नमो भारत के बाद अब मेरठ मेट्रो का भी जल्द ही मेरठ साउथ से मेरठ सेंट्रल तक संचालन होने लगेगा। मेट्रो के 10 ट्रेनसेट दुहाई स्थित डिपो में पहुंच चुके हैं।
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मेरठ साउथ से मेरठ सेंट्रल स्टेशन के ठीक पहले तक मेरठ मेट्रो की विभिन्न ट्रेनों को अलग-अलग गति पर चलाकर उनका परीक्षण किया गया। ट्रायल रन की प्रक्रिया में मेरठ मेट्रो की ट्रेनों का ट्रैक और ट्रैक्शन के साथ परीक्षण किया जा रहा है। इस दौरान ट्रेन कंट्रोल मैनेजमेंट सिस्टम (टीसीएमएस) के तहत आरंभ में मैन्यूअल तरीके से ट्रेन को ऑपरेट किया जा रहा है।
ट्रेन को मेरठ साउथ स्टेशन से बहुत धीमी रफ्तार में मेरठ सेंट्रल के भूमिगत खंड से ठीक पहले तक लाया गया। यहां से वापसी में रफ्तार को थोड़ा बढ़ाते हुए मेरठ साउथ तक लाया गया। इन ट्रेनों को 40 किमी प्रति घंटे से लेकर 135 किमी प्रति घंटे की डिजाइन गति पर चलाकर परीक्षण किया जा रहा है। अब लगातार ट्रेन की रफ्तार बढ़ाकर ट्रायल जारी रहेगा।
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ट्रायल रन के दौरान, अंतरराष्ट्रीय मानक प्रक्रिया के अनुसार ट्रेनों के विभिन्न प्रकार के परीक्षण किए जाते हैं। इनमें यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, ट्रेनों में सैंडबैग भरकर वजन परीक्षण करना और ट्रेनों की गतिशील परिस्थितियों में सुरक्षा संबंधी जांच शामिल है।
साथ ही, इस प्रक्रिया में यात्रियों के लिए राइडिंग कम्फर्ट या आरामपूर्वक यात्रा का भी मूल्यांकन किया जाता है। इसके लिए ट्रेनों को कॉरिडोर में ट्रैक पर उपलब्ध विभिन्न मोड़ पर चलाया जाता है।
इसके अलावा, सिग्नलिंग, प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर (पीएसडी), ओवरहेड सप्लाई सिस्टम आदि जैसे विभिन्न उप-प्रणालियों के साथ इसके समन्वय को सत्यापित करने के लिए ट्रेन के एकीकृत प्रदर्शन की जांच करने हेतु कुछ परीक्षण भी किए जाते हैं।
सुविधाओं से लैस है मेरठ मेट्रो
मेरठ मेट्रो के लिए तीन कोच वाले 12 ट्रेनसेट का निर्माण गुजरात के सावली स्थित मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट में किया गया है। इनमें से 10 ट्रेनसेट दुहाई स्थित डिपो पहुंच चुके हैं। मेरठ मेट्रो के डिजाइन में यात्रियों के लिए अधिकतम आराम और सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
ट्रेनें वातानुकूलित हैं। इनमें एर्गोनॉमिक रूप से डिजाइन की गई दो गुना दो ट्रांसवर्स और लंबवत (लांगिट्यूडनल) बैठने की व्यवस्था है। इसमें सामान रखने की रैक, ग्रैब हैंडल, यूएसबी डिवाइस चार्जिंग सुविधा और यात्रियों के लिए आवश्यक अन्य कई सुविधाएं प्रदान की गई हैं।