मेरठ जनपद में तेल माफियाओं की रिहाई रुकवाकर पुलिस-प्रशासन ने गैंगस्टर और रासुका लगाने की तैयारी कर ली है। चार आरोपियों की जमानत होते ही पुलिस ने धारा बढ़ाकर अर्जी कोर्ट में दाखिल की। जिसके बाद ही आरोपियों की रिहाई का परवाना रोका गया। पुलिस का दावा कि एसआईटी की पड़ताल के बाद गंभीर धारा बढ़ाई गई। लेकिन जमानत के बाद ही पुलिस का हरकत में आना सवाल भी खड़ा कर रहा है। अब डीएम के निर्देश पर गैंगस्टर और रासुका लगाने की तैयारी तेज हो गई है।
नकली पेट्रोल-डीजल मामला: रुकी तेल माफियाओं की रिहाई, अब गैंगस्टर और रासुका की तैयारी
टीपीनगर और परतापुर में थिनर, सॉल्वेट और बेंजीन से नकली पेट्रोल-डीजल बनने का 20 अगस्त को पुलिस ने पर्दाफाश किया था। तेल माफिया राजीव जैन, प्रदीप गुप्ता, नितिन जैन उर्फ गुड्डू समेत 11 आरोपी जेल में हैं। एसआईटी इसकी जांच कर रही है। जेल में आरोपी राजीव जैन निवासी महावीर नगर, श्वेत सचदेवा निवासी पंजाबीपुरा, उमेश राय निवासी टीपी नगर और तपसीराम निवासी गुप्ता कॉलोनी टीपी नगर ने मंगलवार को जमानत अर्जी लगाई। बुधवार को चारों आरोपियों को जमानत मिल गई।
एसआईटी प्रभारी अविनाश पांडेय के मुताबिक जांच पड़ताल और साक्ष्य के आधार पर आरोपियों पर धारा 467, 468, 471 और 120 बी की बढ़ोत्तरी की गई। जिसकी कोर्ट में अर्जी देकर मुकदमे में शामिल कराया गया। जिसका नतीजा हुआ कि आरोपियों को रिहाई रोकी गई। जेल में जाने वाला रिहाई परवाना रोक दिया। इस कार्रवाई के बाद आरोपियों पर गैंगस्टर और रासुका लगाने की तैयारी भी अंतिम दौर में है।
अब कसेगा तेल माफियाओं पर शिकंजा
तेल माफियाओं पर अब जो धाराएं बढ़ाई गई हैं, उससे पूरी तरह इन पर शिकंजा कसा जा सकेगा। यदि इन आरोपियों के खिलाफ बढ़ाई गई धाराओं को पुलिस न्यायालय में सिद्ध कर देती है, तो यह तय है कि आरोपियों को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। बढ़ाई गई तीनों धाराओं के तहत सुनवाई प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के यहां होगी। इन धाराओं में धारा 467 आईपीसी के तहत उम्रकैद की सजा और जुर्माना हो सकता है। जबकि धारा 468 आईपीसी में 7 वर्ष तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। इसी तरह धारा 471 आईपीसी के तहत भी 7 वर्ष तक और जुर्माना हो सकता है। सीनियर अधिवक्ता अमित दीक्षित का कहना है कि धारा 467, 468, 471 और 120 आईपीसी में आरोपियों का न्यायिक रिमांड बना है। पुलिस साक्ष्य कोर्ट में प्रस्तुत कर दे, उससे केस और मजबूत हो सकता है।
विवेचना कमजोर या फिर मजबूत घेराबंदी
तेल माफियाओं को 15 दिन में जमानत मिलने में पुलिस की विवेचना भी सवालों के घेरे में है। कमजोर धाराएं और साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को जमानत मिल गई। पुलिस ने धारा 420, आवश्यक वस्तु अधिनियम 3 व 7 आईपीसी के तहत कार्रवाई की थी। उसके बाद पुलिस ने मुकदमे में कोई धारा नहीं बढ़ाई। इन्हीं धाराओं में 11 आरोपियों का न्यायिक रिमांड बना। 14 दिन की न्यायिक हिरासत पूरी होते ही पहली सुनवाई में ही उनकी जमानत हो गई, जिसे लेकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।