‘गोलियां चल रही थीं...पत्थर बरस रहे थे। मंजर इतना खतरनाक था कि अल्फाजों में बयां करना मुश्किल है। एक तरफ बेखौफ भीड़ थी, तो दूसरी तरफ पुलिस। चारों तरफ उपद्रव ही उपद्रव।’ यह कहना है मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती घायल पुलिसकर्मियों और लोगों का। किसी को गोली लगी है तो कोई पत्थर लगने से घायल है।
खतरनाक मंजर..गोलियां चल रही थीं, पत्थर बरस रहे थे, यूपी बवाल की कहानी, घायलों की जुबानी
मेडिकल में भर्ती 108 आरएएफ के सब इंस्पेक्टर बीडी शुक्ला अमेठी के रहने वाले हैं। उनके पैर में गोली लगी है। उन्होंने बताया कि चारों तरफ से पथराव हो रहा था। भीड़ गोली भी चला रही थी। एक गोली आकर मेरे पैर में लगी। साथियों ने मुझे गली में ले जाकर बैठाया। कुछ देर बाद पुलिस पार्टियां इकट्ठा हुई। तब जाकर साथी पुलिसवाले अस्पताल लेकर आए।
आरएएफ के सिपाही अनुज कुमार और अंकित राठी भी मेडिकल में भर्ती हैं। अंकित के हाथ में गोली लगी है। उन्होंने बताया कि उपद्रवी पत्थर के साथ गोली भी चला रहे थे। वहीं, अनुज के चेहरे पर पत्थर लगे हैं।
मेडिकल कॉलेज लाए गए समद (18) पुत्र इकबाल के कंधे में गोली लगी है। वह श्यामनगर का रहने वाला है। इसने बताया कि मैं शॉप्रिक्स मॉल में किताबों में बाइडिंग का काम करता हूं। पैदल घर जा रहा था, तभी देखा झगड़ा होने लगा। अचानक कोई चीज आकर लगी और मैं बेहोश हो गया। मेरे दोस्त मुझे घर लेकर गए।
मेडिकल में भर्ती अमजद (18) के हाथ में गोली लगी है। उसने बताया कि वह पीर वाली गली में किराए के मकान में परिवार के साथ रहता है। बाहर से शोर की आवाज आ रही थी। मैंने बाहर निकलकर देखा तो बहुत भीड़ थी। लोग ज्यादा थे और पुलिसवाले कम। अचानक पथराव और फायरिंग शुरू हो गई। मेरे हाथ में गोली आकर लगी। तभी मेरा भाई मुझे देखने घर से आया और अस्पताल ले आया। मेरे हाथ में फ्रैक्चर है।