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कांवड़ हादसा: मां के आंचल से बिछड़ गए 'लाल', छह मौतों से हर तरफ मातम, परिवार का इकलौता चिराग था लक्ष्य

Mon, 17 Jul 2023 02:06 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 17 Jul 2023 02:06 PM IST
सार

कांवड़ हादसा: मां के आंचल से बिछड़ गए 'लाल', छह मौतों से हर तरफ मातम, परिवार का इकलौता चिराग था लक्ष्य

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Meerut Accident: Shocked in family members after sons killed due to Kanwar yatra
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

मेरठ के राली चौहान गांव से खुशी-खुशी डाक कांवड़ लेने गए शिवभक्तों को लेकर किसी नहीं सोचा था कि इनके साथ कोई अनहोनी हो जाएगी। शिवभक्तों को गंगा जल लेकर गांव में खुशी-खुशी पहुंचना था लेकिन, भगवान को ऐसा मंजूर नहीं था। दरअसल, गांव से एक किलोमीटर पहले ही इनकी डाक कांवड़ हाईटेंशन विद्युत लाइन से टकरा गई, जिससे सभी कांवड़िये बुरी तरह झुलस गए। इनमें से छह की मौत हो गई और अन्य का उपचार चल रहा है। वहीं, हादसे के बाद कफन में लिपटे छह शिवभक्त गांव पहुंचे तो हर तरफ कोहराम मच गया।

Meerut Accident: Shocked in family members after sons killed due to Kanwar yatra
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

इकलौता बेटा था लक्ष्य, गया था कांवड़ देखने
हादसे में सुनील का 12 वर्षीय बेटा लक्ष्य भी मौत के मुंह में समा गया। लक्ष्य परिवार में इकलौता बेटा था। उससे छोटी छह वर्षीय पलक है। सुनील मजदूरी करता है। शाम के समय जैसे ही लक्ष्य को पता चला कि गांव में डाक कांवड़ आ रही है तो वह भी देखने के लिए चला गया। अंधेरा होने के कारण उसकी मां विजया ने उसे जाने से भी रोका था, लेकिन वह नहीं माना। लक्ष्य का हाथ ट्रॉली से लग गया, तभी वह करंट की चपेट में आ गया। अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी देर रात मौत हो गई थी। बेटे का शव जैसे ही घर पहुंचा तो मां विजया उसे देखकर बेहोश हो गई।

Meerut Accident: Shocked in family members after sons killed due to Kanwar yatra
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

भतीजे को बचाने के प्रयास में गई लख्मी की जान
हादसे का शिकार हुए 45 वर्षीय लख्मी मजदूरी करते थे। उसके तीन बेटे प्रवीण, लक्की और कर्ण हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। ग्रामीणों ने बताया कि लक्ष्य लख्मी का भतीजा था। जब लक्ष्य डाक कांवड़ देखने के लिए घर से निकला तो पीछे-पीछे लख्मी भी चल दिए। जिस समय लक्ष्य को करंट लगा, तभी लख्मी ने उसे बचाने की कोशिश की। उसे नहीं पता था कि ट्रॉली में करंट उतरा हुआ है और वह भी करंट की चपेट में आ गए।

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Meerut Accident: Shocked in family members after sons killed due to Kanwar yatra
विलाप करते परिजन। - फोटो : अमर उजाला

प्रशांत और हिमांशु की मौत से टूटा परिवार
सुरेश सैनी के परिवार में छह बेटे हैं। 18 वर्षीय प्रशांत और 14 वर्षीय हिमांशु की मौत हो गई, जबकि तीसरा बेटा विशाल जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। प्रशांत पुलिस की तैयारी कर रहा था। सुरेश का पूरा परिवार भोले का भक्त है। परिवार का कोई न कोई सदस्य हर बार कांवड़ लेकर आता था। उनकी रोजी-रोटी परचून की दुकान से चलती है। प्रशांत आइटीआई और हिमांशु 10वीं क्लास में पढ़ता था। दो भाइयों की मौत के बाद छोटे भाई अभय, अजय और कार्तिक का भी रो-रोकर बुरा हाल है।

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Meerut Accident: Shocked in family members after sons killed due to Kanwar yatra
विलाप करते परिजन। - फोटो : अमर उजाला

मजदूरी कर परिवार को पाल रहा था महेंद्र
हादसे में 40 वर्षीय महेंद्र भी मौत के मुंह में समा गया। वह मजदूरी कर अपनी पत्नी और बेटे के साथ गुजर-बसर कर रहा था। पिता की मौत के बाद 22 वर्षीय गौरव रोते-बिलखते हुए कह रहा था कि शायद उस दिन पापा को कांवड़ लाने से रोक देते तो वह जिंदा होते। महेंद्र की पत्नी अंजू भी बेसुध है।

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