मेरठ में इस परिवार के दर्द को बयां नहीं किया जा सकता। माता-पिता ने बेटा खो दिया। चंद साल पहले ही जीवन संगिनी बनी ईरा ने अपना सुहाग। पांच साल की बेटी कैरा तो अभी इस दर्द को समझ भी नहीं सकती है। केतन के पिता रविंद्र कुमार शर्मा शायद ही अब जिंदगी में कभी हंस पाएंगे। बीमार मां का क्या हाल होगा। मासूम के सवालों का जवाब ये मां क्या देगी जिसने अपना सब कुछ खो दिया है। शहीद मेजर केतन के परिवार को ताउम्र ये सवाल सालते रहेंगे। केतन की वो अंतिम बातें जिंदगी भर याद रहेंगी कि जो उन्होंने ऑपरेशन पर जाने के दौरान पिता और पत्नी से की थीं।
सुबकते रहे शहीद मेजर के पिता, बोले- बेटी कैरा से किए वादे कौन पूरे करेगा केतन...
पिता देर रात तक सबसे यही कहते रहे कि इसकी मां को अभी कुछ मत बताना। बीमार है। सह नहीं पाएगी। मायके गई केतन की पत्नी से भी फोन पर बस यही कहा कि आ जाओ। कुछ देर खामोश रहते तो कभी सुबकने लग जाते... बिलखकर बार-बार यही कहते कि पोती कैरा से किए गए वादे कौन पूरे करेगा केतन। तुम सबसे रोज हालचाल पूछते थे। अब कौन पूछेगा केतन।
कंकरखेड़ा के श्रद्घापुरी निवासी रविंद्र कुमार शर्मा ने जिंदगी में काफी उतार-चढ़ाव देखे। मोदी रबर फैक्टरी बंद होने के बाद उन्होंने मेरठ में रहकर बेटे केतन और बेटी मेघा को अच्छे से पढ़ाया लिखाया। बेटे की इच्छा सेना में जाने की थी। अपनी मेहनत के दम पर केतन ने सेना में अफसर बनकर पिता का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। दिल्ली की ईरा से शादी होने के बाद घर में बेटी कैरा का जन्म हुआ तो खुशियां दोगुनी हो गईं। सब कुछ तो ठीकठाक चल रहा था। 27 मई को छुट्टी पर घर आए तो सबको वक्त दिया। मां-पिता के साथ ही रिश्तेदारों से भी मिले। बिटिया की नाराजगी उसकी चीजें दिलाकर पूरी की।
सबको खुश करके केतन जम्मू गए तो रोजाना फोन पर सबसे बातचीत का सिलसिला चलता रहा। रोजाना पत्नी, बेटी, मां, पिता से बात करके सबका हालचाल लेते थे। मां के बीमार रहने के कारण पिता से अधिकतर यही बात होती कि उनका ध्यान रखना। लेकिन सोमवार को आई इस मनहूस खबर ने सब कुछ उजाड़कर रख दिया। पिता रविंद्र कुमार ये समझ ही नहीं पा रहे हैं कि करें तो आखिर करें क्या? कैसे उसकी मां को जाकर बताएं कि तेरा लाल देश के लिए शहीद हो गया है। बहू ईरा का कैसे सामना करें। सुबकते हुए बस वह यही बड़बड़ाते रहे कि सबसे कहता था कि ध्यान रखना लेकिन खुद अपना ध्यान नहीं रखा। अब मां के बारे में कौन पूछेगा। बहू और पोती से किए वादे कौन पूरे करेगा।
फिर एक लाल...ये क्या हो गया
मेजर केतन के शहीद होने की खबर सोमवार रात तक मेरठ में सोशल साइट पर वायरल होने लगी। श्रद्घापुरी में भी जिसने सुना वो उनके घर पहुंच गया। आसपास के लोगों की जुबां पर बस एक ही बात थी कि चार महीने पहले 18 फरवरी को बसा टीकरी के अजय का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर आया था। अब मेजर केतन की खबर आ गई। फिर एक लाल मेरठ का शहीद हो गया।