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महाभारत सर्किट: शोर से दूर जाना चाहते हैं, तो आपके लिए है मुजफ्फरनगर का ये खूबसूरत गांव

Thu, 05 Mar 2020 12:56 PM IST
Dimple Sirohi रैना पालीवाल, अमर उजाला, मेरठ
रैना पालीवाल, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 05 Mar 2020 12:56 PM IST
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Mahabharata Circuit: want to get rid of noise, this beautiful village of Muzaffarnagar is for you
महाभारत सर्किट -संभलहेड़ा मुजफ्फरनगर - फोटो : अमर उजाला

दुनिया और अपने भीतर होने वाले शोर से दूर जाना चाहते हैं तो संभलहेड़ा आपके लिए है। मुजफ्फरनगर के इस गांव में विश्व के तीन पंचमुखी शिवलिंगों में से एक का वास है। असीम शांति और दिव्य वातावरण में एक अलग ही अनुभूति होती है। जब गर्भगृह में जाते हैं तो यह अनुभूति चरमोत्कर्ष पर होती है...

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Mahabharata Circuit: want to get rid of noise, this beautiful village of Muzaffarnagar is for you
महाभारत सर्किट -संभलहेड़ा मुजफ्फरनगर - फोटो : अमर उजाला
जो आंखों के सामने है, वह अनन्य भी है और अप्रतिम भी। कसौटी पत्थर से निर्मित पंचमुखी शिवलिंग का कलात्मक सौंदर्य निरखते बनता है। मन शिव शंभू की भक्ति में लीन हो जाता है। कहा भी जाता है कि यहां सच्चे मन से जो भी मांगा जाता है, वह पूरा हो जाता है। अलौकिकता और इतिहास की खोज में विचरते लोगों को एक बार यहां जरूर आना चाहिए। 

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महाभारत सर्किट -संभलहेड़ा मुजफ्फरनगर - फोटो : अमर उजाला
जानसठ से करीब सात किमी दूर संभलहेड़ा में स्थित सिद्ध रुद्रेश्वर पशुपतिनाथ पंचमुखी मंदिर की ख्याति चारों ओर फैली है। दूर-दूर से भक्त महादेव के दर्शन करने आते हैं। कहा जाता है कि विश्व में तीन पंचमुखी शिवलिंग हैं जिनमें से एक यहां है अन्य दो नेपाल और राजस्थान में हैं। 
Mahabharata Circuit: want to get rid of noise, this beautiful village of Muzaffarnagar is for you
महाभारत सर्किट- संभलहेड़ा मुजफ्फरनगर - फोटो : अमर उजाला
यह मंदिर संवत 1514 का है। इस दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण है। आमने-सामने दो मंदिर हैं। योनिपट्ट पर पंचमुखी शिवलिंग के अलावा 11 रुद्र भी बने हैं। शिव के मस्तक पर नाग और मां गंगे सुशोभित हैं।  मंदिर प्रांगण में एक अन्य पंचमुखी शिवलिंग है। प्रबंधक बताते हैं कि करीब 40 साल पहले यहां खोदाई में यह शिवलिंग निकला था। पुरातत्वविदों ने इसे छह हजार वर्ष प्राचीन बताया। यह शिवलिंग भी अत्यंत सुंदर है। 

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महाभारत सर्किट -संभलहेड़ा मुजफ्फरनगर - फोटो : अमर उजाला
इतिहास के गवाक्ष से 
मंदिर के प्रबंधक कृष्णपाल बताते हैं, बड़े-बूढ़े मंदिर की कहानी बताते थे। हरिद्वार में एक मौनी बाबा थे। भगवान ने उन्हें स्वप्न देकर कहा कि संभलहेड़ा में मेरी पूजा-अर्चना कराओ। तब मौनी बाबा खुद यह शिवलिंग लेकर आए और यहां उसकी स्थापना की। तुलसीराम के बेटे हुकूमत राय जो वैश्य परिवार से थे, ने मंदिर का निर्माण कराया। इस मंदिर को भी तोड़ने का प्रयास हुआ लेकिन सफल न हो सका। राजस्थान, एमपी, महाराष्ट्र हर जगह से लोग यहां आते हैं। मंदिर चंदा और दान से चलता है।
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