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महाभारत सर्किट: परीक्षितगढ़, जो सुनाता है कलयुग के आरंभ की ऐतिहासिक कथा, आज भी मौजूद हैं साक्ष्य  

Sat, 29 Feb 2020 04:35 PM IST
Dimple Sirohi रैना पालीवाल, अमर उजाला, मेरठ
रैना पालीवाल, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 29 Feb 2020 04:35 PM IST
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Mahabharata Circuit: Parikshitgarh, which narrates historical story of the beginning of kalyug
hastinapur temple - फोटो : अमर उजाला

परीक्षितगढ़ ने न अपना नाम बदला और न स्वरूप। यह ऋषि मुनियों की पावन भूमि है। इसकी रज ने उनके तप का तेज पाया है। श्रीकृष्ण के चरण कमलों ने यहां सौरभ लुटाया है। कृष्ण द्वैपायन व्यास ने महाभारत के महाग्रंथ के उत्तरार्द्ध की रचना कर इस भूमि का महात्म्य बढ़ाया है...

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Mahabharata Circuit: Parikshitgarh, which narrates historical story of the beginning of kalyug
hastinapur temple - फोटो : अमर उजाला
अगर आप शहर की भीड़भाड़ से दूर पुरातन में पूरेपन के साथ डूबना चाहते हैं तो परीक्षितगढ़ आपके लिए ही है। समय निकालकर यहां के श्रृंगी ऋषि आश्रम जरूर आइये। महाभारत सर्किट का यह अहम पड़ाव हो सकता है।
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Mahabharata Circuit: Parikshitgarh, which narrates historical story of the beginning of kalyug
hastinapur temple - फोटो : अमर उजाला
इस सुरम्य स्थान पर आकर कलयुग के आरंभ की कथा को सुना जा सकता है। बूढ़े विटपों की एक दूसरे से गुंथी हुई शाखाएं मनोरम दृश्य बनाती हैं। चारों ओर पसरी शांति मन को बहुत सुहाती है। धार्मिक पर्यटन को विकसित कर इस जगह से और भी अधिक श्रद्धालुओं को जोड़ा जा सकात है।
Mahabharata Circuit: Parikshitgarh, which narrates historical story of the beginning of kalyug
hastinapur temple - फोटो : अमर उजाला
किला परीक्षितगढ़ से एक किमी दूर है श्रृंगी ऋषि का आश्रम। वृक्षों से आच्छादित इस स्थल का नैसर्गिक सौंदर्य निरखते बनता है। इनमें एक संबल का प्राचीन वृक्ष भी है जिसके बारे में लोग कहते हैं, इसके नीचे शमीक ऋषि तपस्या में लीन थे।

जब राजा परीक्षित ने उनके गले में सर्प डाला। इस कथा को यहां मूर्तवान भी किया गया है। बाईं ओर एक ताल है। पं. हरिशंकर शर्मा ने अपनी पुस्तक ‘इतिहास पुण्य पुरातन किला परीक्षितगढ़’ में इसे कौशिकी नदी का अवशेष कहा है।  
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Mahabharata Circuit: Parikshitgarh, which narrates historical story of the beginning of kalyug
hastinapur temple - फोटो : अमर उजाला
इसके अनुसार श्रृंगी ऋषि यहीं नदी में स्नान कर रहे थे। इसी स्थान पर उन्होंने राजा परीक्षित को शाप दिया था कि सात दिन बाद तक्षक नाग द्वारा उनकी मृत्यु होगी। मंदिर में प्राचीन शिवलिंग है।

हनुमान जी की मूर्ति भी है। आश्रम में शमीक और श्रृंगी ऋषि की समाधि बनी हुई है। रविवार को मेरठ से परीक्षित दर्शन नामक बस इस स्थान पर श्रद्धालुओं को लाती है। इसका और भी विस्तार किया जा सकता है। 
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