फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

भारत के प्रमुख तीर्थों में सर्वश्रेष्ठ माना गया मोक्षदायक तीर्थ, यहां आना किसी सौभाग्य से कम नहीं

Sat, 07 Mar 2020 12:26 PM IST
कपिल kapil रैना पालीवाल, अमर उजाला, मेरठ
रैना पालीवाल, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 07 Mar 2020 12:26 PM IST
विज्ञापन
Mahabharata Circuit, salvation shrine is considered the best among the 68 major pilgrimages of India
शुकदेव जी का मंदिर। फोटो : संजू - फोटो : अमर उजाला

जो भागवत रूपी रस सिंधु का उत्स था, वह आज उसका नित्य उत्सव है। जहां भक्ति की पावन पवन बहती है। जिसके वातावरण में अखंड यज्ञ का सौरभ बिखरा है। साधु-संतों और भक्तों की कतार, भजनों की मधुर गुंजार और भागवत रूपी अमृत की बरसती फुहार... शुक तीर्थ की इस अलौकिकता से कोई अछूता नहीं रह सकता। यहां आने वाला यहीं का हो जाता है। कोई भजन गाता है, ये तो प्रेम की बात है ऊधौ बंदिगी तेरे बस की नहीं है...। मन आनंद विभोर हो जाता है। साधु-संतों और साधकों का यह प्रिय ठाम है।

Mahabharata Circuit, salvation shrine is considered the best among the 68 major pilgrimages of India
महाभारत सर्किट - फोटो : अमर उजाला

गंगा के कूल पर स्थित इस तीर्थ को भारत के 68 तीर्थों में से सर्वश्रेष्ठ मोक्षदायक तीर्थ माना गया है। अक्षय वट की छांव में आना किसी सौभाग्य से कम नहीं, जहां शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को भागवत कथा का अमृत पान कराया था। भागवत ज्ञान गंगा की यह उद्गम स्थली दिव्यता से दीप्तिमान है।

Mahabharata Circuit, salvation shrine is considered the best among the 68 major pilgrimages of India
शिव प्राचीन मंदिर - फोटो : अमर उजाला

मुजफ्फरनगर से करीब 30 किमी दूर महाभारत कालीन शुक तीर्थ वर्तमान में शुक्र ताल के नाम से प्रख्यात है। टीले पर स्थित अक्षय वट पांच हजार वर्ष पुरानी कथा को संजोए खड़ा है। श्रृंगी ऋषि का शाप मिलने पर मोक्ष प्राप्ति के लिए राजा परीक्षित इसी वृक्ष के नीचे आकर भगवान के ध्यान में बैठ गए थे। इसी वृक्ष के नीचे शुकदेव जी ने अपनी रसना से भागवत रूपी रस बरसाया जिससे राजा परीक्षित को मुक्ति मिली। इसे भागवत की जन्म स्थली भी कहा जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Mahabharata Circuit, salvation shrine is considered the best among the 68 major pilgrimages of India
अक्षय वट - फोटो : अमर उजाला

शुक तीर्थ के आचार्य सुमन कृष्ण हमें यहां की सभी निधियों से मिलवाते हैं। वह हमें अक्षय वट पर स्वयं प्रकट हुए गणेश जी के दर्शन भी कराते हैं। आचार्य श्री कहते हैं, राजा परीक्षित के यहां आगमन के बाद देवता अमृत लेकर आए। उन्होंने राजा परीक्षित से अमृत पान करने को कहा। शुकदेव जी से चर्चा के बाद राजा ने भगवद् प्राप्ति कराने वाले भागवत रूपी सुधा का पान करने का निश्चय किया। तब देवताओं ने इस वट में अमृत डाल दिया। जिससे यह अमर हो गया। पहले इस स्थान का नाम शुक तार था।

विज्ञापन
Mahabharata Circuit, salvation shrine is considered the best among the 68 major pilgrimages of India
समाधि स्थल - फोटो : अमर उजाला

तीर्थ में यूं तो कई मंदिर हैं लेकिन मुख्य शुकदेव जी का है। बाईं ओर शुकदेव जी, दाईं ओर राजा परीक्षित और दोनों ऋषि-मुनि की मूर्ति स्थापित हैं। राधा रानी यहां गुप्त रूप से विराजमान हैं। दूसरा मंदिर विट्ठल भगवान का है। शुक्र ताल के वर्तमान पीठाधीश्वर ओमानंद सरस्वाती ने मंदिर की स्थापना कराई। गर्भगृह में विट्ठल भगवान व रुक्मिणी विराजमान हैं। शुक्र ताल में महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। यह मंदिर उनकी आस्था से जुड़ा है। विट्ठल के मस्तक के पीछे शिवलिंग है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed