फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Kargil Vijay Diwas: दुश्मन पर भारी पड़े थे मेरठ के ये पांच जांबाज, कारगिल के रण में देश के लिए दी थी कुर्बानी

Fri, 26 Jul 2024 12:08 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 26 Jul 2024 12:08 PM IST
विज्ञापन
Kargil Vijay Diwas: five sons of Meerut sacrificed their lives in the Kargil War
भारतीय सेना - फोटो : अमर उजाला

कारगिल का रण मेरठ के वीर सपूतों की बहादुरी का गवाह है। हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पर इन जवानों के शौर्य को नमन किया जाता है। अपनों को खोने वाले परिवारों का सीना अब भी गर्व से चौड़ा हो जाता है। शहीदों के परिवारों का ऋण ये देश कभी नहीं चुका पाएगा।



कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी फौजियों को भारतीय फौजियों ने पूरी तरह खदेड़कर भारतीय सीमा से बाहर कर दिया। इसके बाद पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने ऑपरेशन विजय को पूरी तरह सफल होने की घोषणा की। इस युद्ध में मेरठ के पांच सपूतों को देश के लिए कुर्बानी देनी पड़ी। इन जांबाजों के परिवार के सदस्यों का सीना आज भी गर्व से चौड़ा हो जाता है। इन शहीदों के परिवारों का ऋण ये देश कभी नहीं चुका पाएगा।

Kargil Vijay Diwas: five sons of Meerut sacrificed their lives in the Kargil War
शहीद ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला

योगेंद्र यादव ने टाइगर हिल पर झेली दुश्मन की गोलियां
कारगिल युद्ध में टाइगर हिल पर पाकिस्तानी सेना ने सबसे ज्यादा नुकसान किया। दुश्मन 18 हजार फीट की ऊंचाई पर और हमारे जवान नीचे। दुश्मन पत्थर भी फेंकते तो गोली की तरह लगता। उधर से मशीनगन चल रही थी। कई अफसर-जवान शहीद हो गए थे। तब मेरठ के योगेंद्र यादव की बटालियन को टास्क दिया गया।

ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव ने अपने सात साथियों के साथ प्वाइंट पर पहुंचकर पाकिस्तानी बंकरों को ध्वस्त किया। उन्होंने दुश्मन के 17 जवानों को मौत के घाट उतार दिया। पांच जुलाई 1999 की शाम को दुश्मन की जवाबी गोलीबारी में योगेंद्र सिंह यादव शहीद हो गए। उनकी वीरता के लिए उन्हें वीर चक्र मेडल दिया गया।

Kargil Vijay Diwas: five sons of Meerut sacrificed their lives in the Kargil War
शहीद हवलदार यशवीर सिंह - फोटो : अमर उजाला

दुश्मनों को यशवीर सिंह ने किया नेस्तानाबूद
रोहटा रोड पर रहने वाली वीर नारी मुनेश देवी बताती हैं कि उनके पति हवलदार यशवीर सिंह की बटालियन को तोलोलिंग का टास्क दिया गया था। 12 जून को टू-राजपूताना राइफल ने मेजर विवेक गुप्ता के नेतृत्व में 90 जवानों ने इस प्वाइंट पर हमला बोल दिया। प्वाइंट 4950 पर कब्जे के लिए भीषण युद्ध हुआ।

हवलदार यशवीर सिंह ने सीने पर गोलियां लगने के बावजूद ग्रेनेड के साथ पाकिस्तानी सेना के बंकरों पर हमला कर दिया। 40-50 दुश्मनों को मारकर वह शहीद हो गए। 13 जून 1999 को तोलोलिंग पर भारतीय सेना ने तिरंगा फहरा दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन
Kargil Vijay Diwas: five sons of Meerut sacrificed their lives in the Kargil War
शहीद मेजर मनोज तलवार - फोटो : अमर उजाला

तिरंगा फहराकर शहीद हुए मेजर मनोज तलवार
मवाना रोड स्थित डिफेंस काॅलोनी ए-34 निवासी मेजर मनोज तलवार की फरवरी 1999 में फिरोजपुर पंजाब में तैनाती हुई, लेकिन वह देश के लिए कुछ करना चाहते थे। उन्होंने सियाचिन में नियुक्ति मांगी। कारगिल में युद्ध हुआ तो उनकी बटालियन को टुरटुक में भेजा गया।

13 जून को उन्होंने कारगिल सेक्टर टुरटुक में तिरंगा फहरा दिया। इसी बीच दुश्मन की तोप के गोले के हमले में वह शहीद हो गए। उनके पिता रिटायर्ड कैप्टन पीएस तलवार का भी कुछ दिन पहले निधन हो गया था।

विज्ञापन
Kargil Vijay Diwas: five sons of Meerut sacrificed their lives in the Kargil War
शहीद लांस नायक सत्यपाल सिंह - फोटो : अमर उजाला

फतह के बाद शहीद हुए सत्यपाल सिंह
मूलरूप से गढ़मुक्तेश्वर के लुहारी गांव निवासी लांसनायक सत्यपाल सिंह का जनवरी 1999 में जम्मू तबादला हुआ था। इसी बीच कारगिल की जंग शुरू हो गई।

उनकी बटालियन सेकेंड राजपूताना राइफल्स को कारगिल पहुंचने का आदेश मिला। तोलोलिंग जीतने के बाद 28 जून को दुश्मनों से लड़ते हुए वह द्रास सेक्टर में शहीद हो गए। तब बड़ा बेटा पुलकित साढ़े तीन साल और बेटी दिव्या ढाई साल की थी।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed