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एसबीआई कॉन्क्लेव: 'वित्तीय क्षेत्र अगली पीढ़ी के उद्यमों को दे पूंजी', बोले पीएम के प्रधान सचिव पीके मिश्रा

Wed, 23 Sep 2026 05:27 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 23 Sep 2026 05:27 PM IST
सार

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने वित्तीय क्षेत्र से अगले साल की वृद्धि के बजाय अगली पीढ़ी के भारतीय उद्यमों को वित्तपोषित करने का आग्रह किया। उन्होंने ऋण मूल्यांकन को संपार्श्विक से नकदी प्रवाह में बदलने और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

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Financial Sector Must fund Next-Gen Enterprises, Not Just Next Year's Growth: PM's Principal Secretary
पीके मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव - फोटो : ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने वित्तीय क्षेत्र से भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र को केवल अगले साल की वृद्धि के बजाय अगली पीढ़ी के भारतीय उद्यमों को पूंजी देनी चाहिए। मिश्रा ने बुधवार को 13वें एसबीआई बैंकिंग और अर्थशास्त्र कॉन्क्लेव में यह बात कही। उनका मानना है कि भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनने के लिए यह बदलाव जरूरी है।

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मिश्रा ने कहा कि वित्तीय प्रणाली को अब देश के विकास को मजबूत बनाने की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने जोर दिया कि एक बड़ी और परिष्कृत अर्थव्यवस्था को केवल बैंक वित्तपोषित नहीं कर सकते। इसके लिए गहरे कॉरपोरेट बॉन्ड और इक्विटी बाजारों की आवश्यकता है। बड़े संस्थागत निवेशकों और बुनियादी ढांचा कोषों का होना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने ऋण मूल्यांकन के तरीके में बदलाव का भी आह्वान किया। यह बदलाव कोलेटरल से नकदी प्रवाह की ओर होना चाहिए। मिश्रा ने कहा कि यह ऋण मूल्यांकन के निम्न मानकों का तर्क नहीं है। बल्कि यह बेहतर जानकारी और बेहतर ऋण मूल्यांकन के लिए है।

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क्या ऋण मूल्यांकन का तरीका बदलेगा?

मिश्रा ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र को अब कोलेटरल के बजाय नकदी प्रवाह पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने नई तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया ताकि ऋण का विस्तार हो सके। प्रौद्योगिकी उधारदाताओं को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न, बैंक विवरण और भुगतान प्रवाह के माध्यम से व्यवसायों का मूल्यांकन करने में मदद कर सकती है। खाता एग्रीगेटर डेटा और डिजिटल ऋण बुनियादी ढांचा भी सहायक होगा। उधारदाताओं को व्यवसायों का मूल्यांकन उनकी कमाई और भविष्य की क्षमता के आधार पर करना चाहिए। यह प्रमोटरों के स्वामित्व वाली मौजूदा संपत्तियों पर आधारित नहीं होना चाहिए।

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नवाचार के लिए पूंजी क्यों जरूरी है?

मिश्रा ने कहा कि यदि भारत को विनिर्माण से डिजाइन और नवाचार की ओर बढ़ना है, तो पूंजी बाजार तैयार होने चाहिए। उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र और बैंक भी विचारों को वित्तपोषित करने के इच्छुक होने चाहिए। केवल कारखानों को वित्तपोषित करने से काम नहीं चलेगा। भारत की वित्तीय प्रणाली को बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और शहरीकरण के लिए बड़ी मात्रा में पूंजी जुटानी होगी। ऊर्जा संक्रमण और नवाचार के लिए भी विभिन्न प्रकार की पूंजी की आवश्यकता होगी। लंबी अवधि के निवेश के लिए लंबी अवधि की पूंजी चाहिए।

भारत को वैश्विक स्तर पर कैसे आगे बढ़ना है?

उन्होंने कहा कि नवाचार के लिए जोखिम पूंजी की आवश्यकता होती है। उच्च वृद्धि वाले उद्यमों को इक्विटी की जरूरत होती है। बुनियादी ढांचे के लिए धैर्यवान पूंजी और शहरों के लिए नई वित्तीय संरचनाएं आवश्यक हैं। मिश्रा ने घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने और वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों से उत्पन्न कमजोरियों को कम करने पर भी जोर दिया। वित्तीय क्षेत्र को भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों में विस्तार करने में सहायता करनी होगी। इससे भारत अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं का प्रदाता बन सकेगा। उन्होंने कहा कि 2047 का भारत केवल बड़ा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वाला नहीं होगा। यह अधिक उत्पादक, अभिनव, तकनीकी रूप से सक्षम और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी होगा।

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