सात साल पहले बेटी के प्रेमी संजीव उर्फ सैंकी को जिंदा जलाकर मारने वाले गुलाब सिंह, उसके बेटों पम्मी, जॉनी उर्फ विशाल, सन्नी और एक अन्य राहुल को दोषी करार देकर अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। संजीव का जला हुआ शव गंगानगर थाना क्षेत्र के ललसाना गांव के जंगल में जली वैगनआर में मिला था। न्यायालय ने दोषी पर अर्थदंड भी लगाया है।
प्रेम कहानी ऐसी भी: प्रेमिका ने बेटी बन सैंकी की मां को दिलाया इंसाफ, पिता-भाइयों ने जिंदा जला दिया था प्रेमी
बेटी के प्रेमी को कार में जलाकर हत्या करने वाले पिता व भाइयों समेत पांच को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस हत्याकांड में प्रेमिका ने प्रेमी की माैत के बाद उसकी मां को न्याय दिलाने में आखिरी पड़ाव तक लड़ाई लड़ी। पढ़ें ये भावुक कर देने वाली अनूठी कहानी।
सात साल पहले हुई थी वारदात
यह वारदात पल्लवपुरम फेस-2 में पांच दिसंबर 2018 को हुई थी। मवाना थाना क्षेत्र के गांव जंधेडी निवासी संजीव उर्फ सैंकी गुर्जर अपनी प्रेमिका से मिलने पल्लवपुरम आया था। प्रेमिका के सामने ही उसके पिता गुलाब सिंह, तीन भाइयों पम्मी, जॉनी उर्फ विशाल, सन्नी और जॉनी के दोस्त राहुल ने संजीव ने मिलकर सैंकी को कार में जला दिया था। इस मामले में प्रेमिका अपने परिजनों के खिलाफ गवाही देती रही। दो बार परिवार से आमना-सामना हुआ, धमकी भी मिली। इसके बावजूद पीछे नहीं हटी। संजीव की मां के साथ इंसाफ की लड़ाई में आगे रही।
बुधवार को कोर्ट ने हत्यारों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसका पता चलते ही संजीव की मां फफक पड़ी और बोली-बेटे को इंसाफ मिल गया है। उसने इसका सारा श्रेय ब्रह्मवती ने अपने बेटे की प्रेमिका को दिया। अदालत के फैसले पर ब्रह्मवती बोलीं-वह उसे (प्रेमिका) पुत्रवधू बनना चाहती थी, सैंकी की हत्या के बाद उसने बेटी बन कर न्याय दिलाया है। न्यायालय ने सही निर्णय सुनाया है। हत्यारों ने उसके इकलौते बेटे की हत्या कर जिंदगी का सहारा छीन लिया।
बेटी बनाकर सैंकी की मां ने किया बेटे की प्रेमिका का कन्यादान
अपने परिजनों को छोड़कर सैंकी की हत्या के चार दिन बाद ही प्रेमिका जंधेडी में सैंकी की मां ब्रह्मवती के पास रहने लगी थी। ब्रह्मवती ने बेटे की प्रेमिका को बेटी मान लिया था। उसने डेढ साल बाद मार्च 2020 में उसकी शादी भी कर दी थी। अब वह पति के साथ गढ़ मुक्तेश्वर के पास ससुराल में रहती है और वह दो बच्चों की मां भी है।
मिलती रहीं धमकियां, पीछे नहीं हटाए कदम
शुरू से आखिर तक केस से जुड़े रहे दीपक कुमार त्यागी ने बताया कि प्रेमिका की गवाही ही सजा का आधार बनी। उसकी मां, बहन, पिता और भाइयों ने काफी डराया-धमकाया, मगर वह अपने फैसले पर अडिग रही। उसने अदालत में पिता और भाइयों के खिलाफ बयान दिए। उसके सामने ही परिजनों ने सैंकी की हत्या की थी।
हत्यारोपियों को तीन साल बाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। जब दूसरी बार प्रेमिका गवाही देने कोर्ट में आई तो उसकी मां व बहन ने पक्ष में गवाही देने की धमकी दी। इस पर न्यायाधीश ने गुलाब सिंह और उसके तीनों बेटों की जमानत निरस्त कर फिर से जेल भेज दिया था। कोर्ट में प्रेमिका समेत आठ गवाह पेश किए गए। प्रेमिका ने दो बार गवाही दी।
मॉल में नौकरी के दौरान हुई थी मुलाकात
सैंकी की मां ब्रह्मवती जंधेडी गांव में अकेले जीवन यापन कर रही हैं। उसने बताया कि जब सैंकी छह महीने का था, तब बीमारी के चलते उसके पिता रुपचंद की मौत हो गई थी। बामुश्किल उसने बच्चों को पाला। दो बेटियों की शादी की।
इकलौता बेटा सैंकी मोदीपुरम में एक माॅल में नौकरी करता था। माॅल के पास ही प्रेमिका अस्पताल में नौकरी करती थी। यहां दोनों की मुलाकात हुई थी। दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे और शादी करना चाहते थे।
यह भी पढ़ें: सात वर्ष बाद मिला इंसाफ: बेटी के प्रेमी की हत्या में पिता-पुत्रों समेत पांच को उम्रकैद,कार में मिली थी लाश