भाकियू के दिवंगत अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की 87वीं जयंती गुरुवार को मुजफ्फरनगर के सिसौली में किसान-मजदूर अधिकार दिवस के रूप में मनाई जा रही है। बालियान खाप के चौधरी टिकैत ने मुश्किल समय में किसानों को एकजुट कर आंदोलन खड़ा किया। इसके बाद तो जैसे हालात बदलने शुरू हो गए। किसान चेतना का नया दौर शुरू हुआ, जिसमें किसान अपनी बात कहने और हक मांगने लगे। यह बाबा की नेतृत्व क्षमता और किसानों की एकजुटता थी कि सिसौली के किसान भवन पर राजनीतिक लोगों ने शीश झुकाया।
जयंती: पिता का साया उठा तो संघर्ष में तपकर कुंदन बने टिकैत, सिसौली से संसार तक पहुंचाई किसानों की आवाज
किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की यादें और बातें आज भी किसानों के जेहन में है। बाबा ने किसानों को एकजुट कर अधिकारों के लिए संघर्ष करना सिखाया। उनकी दी हुई ताकत पर ही किसान आज अपनी बात पंचायतों से लेकर सरकारी कार्यालयों तक कहने में नहीं हिचकते।
यह भी पढ़ें: Muzaffarnagar: सिसौली में हवन कर मनाई जा रही चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती, रालोद अध्यक्ष भी होंगे शामिल
पिता का साया उठा तो संघर्ष में तपकर कुंदन बन गए टिकैत
सिसौली के सामान्य किसान और बालियान खाप के चौधरी रहे चौहल सिंह का असमय निधन परिवार के लिए बड़ी विपत्ति थी। इसके बाद कम उम्र में ही चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को खाप की पगड़ी पहना दी गई।
जीवन के संघर्ष यहीं से शुरू हुआ। लेकिन कड़ी मेहनत से टिकैत ने परिवार और समाज में बड़ा बदलाव खड़ा कर दिया। खाप के मुखिया के तौर पर उन्होंने गरीब किसानों, मजदूरों की मुश्किलों को बहुत ही नजदीकी से देखा और उनके हक की लड़ाई लड़ने के कारण महात्मा टिकैत के नाम से प्रसिद्ध हो गए ,और हमेशा गरीब किसान और मजदूर के हक की लड़ाई लड़ते रहे।
बिना किसी भेद भाव से किया संघर्ष
मजहब और जातपात की भावनाओ से कोसों दूर उनका जीवन हमेशा गांव और किसान और मजदूर के हितों के चिंतन में लगा रहा, हर किसी की मुश्किलों को बड़े ध्यान से सुनते और कोई राह दिखाते। किसान आंदोलन के चलते उनकी लोकप्रियता देश विदेश में छा गई थी। लोकप्रियता का नशा उन्हे छू न सका। और उन्होंने अपना ठेठ देहाती अंदाज नहीं बदला।