हमारे जांबाज ने शहीद होने से पहले दो आतंकियों को ढेर कर दिया। उसने जो कसम खाई वो पूरी करके गया। ऐसे वीर जवान पर हमें जिंदगी भर फख्र रहेगा। ये कहना था सोमवार को बसी टीकरी गांव में अजय के साथियों का।
वहीं साथियों ने बताया कि कश्मीर में आतंकियों से मुकाबला करने के दौरान अजय बेहद बहादुरी से लड़ा। उसने दो आतंकियों को ढेर करने में अहम भूमिका निभाई। उसके इस साहस की चर्चा शहादत के बाद पूरी रेजीमेंट में रही।
सिपाही अजय कुमार के शहीद होने की खबर उनके गांव के दोस्त फौजी अनिल कुमार के पास सोमवार सुबह चार बजे ही आ गई थी। सुबह आठ बजे तक वे असमंजस में रहे कि बताएं तो कैसे बताएं। वे अजय के पिता से भी मिले, लेकिन बताया कुछ नहीं। इसी बीच टीवी पर खबरें आना शुरू हो गईं। परिजनों को नाम सुनकर पता चल गया कि बेटा शहीद हो गया है।
इसके बाद अनिल से पिता ने पूछा तो उन्होंने बताया कि खबर सही है। सेना का शेर आतंकियों द्वारा धोखे से मारी गई गोली में शहीद हो गया।
बसा टीकरी गांव के अनिल कुमार और अजय पुराने दोस्त हैं। फिलहाल 20 ग्रेनेडियर में नागालैंड में तैनात अनिल कुमार ने बताया कि पिछले साल तक वे जम्मू में साथ-साथ थे। अजय कुमार का चयन कमांडो टीम में हुआ तो उनको 55 आरआर में तैनात कर दिया गया। वे स्पेशल ऑपरेशन की टीम का हिस्सा होते थे। कमांडो टीम में रहते हुए उन्होंने कई आतंकियों को ढेर किया। सर्च ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका में रहते थे।