पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने हर किसी को हिला कर रख दिया। सैनिकों की शहादत के उस मंजर को देखकर हर किसी की आंख भर आई। हर किसी का खून खौल उठा। हालांकि हमले के चंद घंटों के बाद ही हमले के मास्टरमाइंड को मौत के घाट उतार दिया गया। इस हमले में मेरठ के जांबाज शेर अजय कुमार ने भी आतंकियों से लोहा लेते हुए वीरगति प्राप्त की। वह उन जांबाजों में शामिल थे जिन्हें इस स्पेशल ऑपरेशन के लिए चुना गया था। आगे पढ़िए सेना के इस शेर की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी :-
कौन थे सेना के बहादुर अजय, जिन्होंने कई आतंकियों को किया ढेर, जांबाज की इस खूबी पर फिदा थे अफसर
पुलवामा हमले के बाद देश भर में पाकिस्तान को उसकी इस कायराना हरकत का सबक सिखाने की मांग उठी और इसी बीच क्रांतिधरा के लाल अजय कुमार को आतंकियों से अपने साथियों की मौत का बदला लेने का मौका मिला। वह उस टीम का हिस्सा बने जो पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड का खात्मा करने के लिए बनाई गई थी।
अजय ऑपरेशन पर जाने के लिए तैयार थे। अब बस आतंकियों को ठिकाने लगाना था। टीम के इस जांबाज ने आतंकियों से साथियों की मौत का बदला तो ले लिया लेकिन इसकी कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
अजय का परिवार इस बात से अनजान था कि उनका बेटा पूरी रात दुश्मन से दो दो हाथ करता रहा। हालांकि परिवार की वह रात किस बेकरारी में गुजरी होगी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। किसी तरह दिल को समझाकर परिजन रात में सो तो गए लेकिन जब सुबह हुई तो बेटे की शहादत की खबर ने घर में कोहराम मचा दिया।
अजय पहले भी सेना के कई विशेष अभियानों का हिस्सा रह चुके थे। बताया जाता है कि उनका निशाना इतना अचूक था कि दुश्मन का उनसे बच पाना मुश्किल ही थी। उनकी इसी खूबी के लिए उन्हें आतंकी गाजी की घेराबंदी कर उसका सफाया करने वाली टीम में शामिल किया गया था। उनके दोस्त अनिल ने बताया कि वह बारह से भी ज्यादा ऑपेरशनों को हिस्सा रह चुके थे। वह कहते हैं कि अजय शेर था उसे धोखे से गोली मारी गई।