पाकिस्तान से सिर्फ एक कॉल आई और भारतीय सेना का जवान पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के जाल में फंसता चला गया। किसी को भनक तक नहीं लगी और वह पिछले 10 माह से भारतीय सेना की गोपनीय सूचनाएं व्हाट्सएप के जरिए भेजता रहा। आरोपी जवान कंचन सिंह से शुक्रवार तक पूछताछ जारी रही। अगली स्लाइड में जानिए उसके पिता का क्या कहना:-
बागेश्वर निवासी कंचन के आईएसआई के लिए जासूसी के मामले में फंसने के बाद परिजन स्तब्ध हैं। उन्हें गुरुवार को अखबार के जरिये ही इस मामले का पता चला। अब तक सेना ने इस संबंध में परिजनों से कोई संपर्क नहीं साधा है। आरोपी सैन्यकर्मी के माता-पिता का दावा है कि उनका बेटा गद्दार नहीं हो सकता। उसे साजिशन फंसाया गया है। इस संबंध में निष्पक्ष जांच के लिए परिजनों ने सेना को पत्र लिख रहे हैं।
बागेश्वर के गढ़िया गांव निवासी सैन्यकर्मी कंचन सिंह (26) के पिता चंदन सिंह गांव में आटा चक्की चलाते हैं। मां कमला गृहणी हैं। बड़ी बहन का विवाह हो चुका है। अविवाहित बड़ा भाई जगदीश प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक है। कंचन परिवार में सबसे छोटा है। परिजनों को बृहस्पतिवार को अखबार के जरिये बेटे के जासूसी मामले में फंसने का पता चला। तब से परिजन स्तब्ध हैं।
पिता का कहना है कि पहले हर दूसरे-तीसरे दिन बात होती थी। लेकिन, पिछले 10 दिन से कंचन के दोनों मोबाइल नंबर बंद थे। छह अक्तूबर को उससे आखिरी बार बात हुई थी। उसने रोज की तरह हालचाल पूछा था। इसके बाद जब उसके मोबाइल बंद आए तो उन्होंने सोचा कि वो छावनी की एक्सरसाइज में गया होगा।
वहीं सैन्य सूत्रों के मुताबिक सिग्नल रेजीमेंट के इस जवान के मोबाइल फोन पर 10 महीने पहले यह कॉल आई थी। माना जा रहा है कि ये आईएसआई की नियोजित कॉल थी लेकिन कंचन इसे समझ नहीं पाया। कॉलर आईएसआई एजेंट से बातचीत के बाद दोनों में दोस्ती हो गई। कंचन इसके जाल में ऐसा फंसा कि वह आईएसआई की डिमांड पूरी करने लगा। सैन्य सूत्रों की मानें तो उसने 25 के करीब दस्तावेज वाट्सएप के जरिए भेजे हैं। इनमें कुछ सैन्य क्षेत्र के नक्शे भी थे। अभी तक की पूछताछ में यह बात साफ हुई है कि जो भेजी गई जानकारियों से आईएसआई को कुछ खास हासिल होने वाला नहीं है लेकिन कंचन की निरंतर फोन पर होने वाली बातचीत से वह मिलिट्री इंटेलीजेंस और वेस्टर्न कमांड के रडार पर आया।