मेरठ कैंट के नो एंट्री एरिया में सोमवार सुबह दो मासूम बच्चियों की ट्रक से कुचलकर दर्दनाक मौत हो गई। इसका कौन जिम्मेदार है, इसका जवाब देने के बजाय नौकरशाहों ने चुप्पी साध ली है।
पापा एग्जाम है....आखिरी बार स्कूटी ले जाने दो, जिद करके ले गईं दोनों बहनें, फिर हुआ भयानक हादसा
सोमवार सुबह के आठ बजे थे। गणपति विहार कंकरखेड़ा निवासी रिटायर्ड हवलदार छोटू सिंह की दोनों बेटियां अनु (16) और अंजली (12) स्कूल के लिए रोजाना की तरह स्कूटी से निकली थीं। बड़ी बेटी अनु कैंट स्थित सिटी वोकेशनल स्कूल में दसवीं की छात्रा थी जबकि छोटी बेटी अंजली पंजाब लाइन स्थित केंद्रीय विद्यालय में कक्षा पांच में पढ़ती थी।
छोटा भाई अनुज केवी में पढ़ता है। अनु अपने छोटे भाई-बहन को स्कूटी से केवी में छोड़ती थी और फिर अपने स्कूल जाती थी। सोमवार को अनुज स्कूल नहीं गया था। स्कूटी जब 510 आर्मी वर्कशॉप के पास उमराव एंक्लेव के सामने पहुंची तो पीछे से तेज रफ्तार से आ रहे रोडी से भरे ट्रक ने स्कूटी में जोरदार टक्कर मारी।
दोनों बहनें सड़क पर गिरीं और ट्रक का पहिया दोनों का सिर कुचलता हुआ निकल गया। यह दर्दनाक हादसा जिसने भी देखा, उसकी रूह कांप गई। आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े तो आरोपी चालक ट्रक को छोड़कर वहां से भाग निकला।
भगवान का शुक्र है... अनुज स्कूल नहीं गया
रिटायर्ड हवलदार छोटू सिंह की दो ही बेटियां थीं। परिजनों में कोहराम मचा है। परिजनों ने बताया कि रविवार को अनुज एक रिश्तेदार के यहां शादी में गया हुआ था। रात में देरी से आने के चलते सोमवार को वह स्कूल नहीं गया।
दोनों बहनें स्कूटी से स्कूल गई थीं। भगवान का शुक्र रहा कि अनुज बहनों के साथ स्कूल नहीं गया। यह कहकर पिता छोटू सिंह और मां रिंकी बिलखने लगते हैं। शाम को पोस्टमार्टम के बाद दोनों बहनों के शव पहुंचे तो परिजनों में चीख पुकार मच गई।
...मैं आखिरी बार स्कूल जा रही हूं
हादसे का शिकार हुई दोनों बहनों को पता नहीं था कि आज उनके स्कूल जाने का आखिरी दिन होगा। अनु स्कूल जाने के लिए तैयार होते समय भाई बहन से कह रही थी कि मैं तो आज आखिरी बार स्कूटी से स्कूल जा रही हूं। मेरा आज लास्ट एग्जाम है। उसके बाद छुट्टी पड़ जाएंगी। वहीं, अंजली भी कह रही थी कि स्कूटी से तीनों का एक साथ स्कूल जाना ठीक नहीं है।
पिता को भी यह बात पता थी कि बच्चियों का स्कूटी से स्कूल जाना अभी ठीक नहीं है, इसलिए उन्होंने एक ऑटो चालक से बात कर ली थी। मंगलवार से तीनों बच्चों को ऑटो से स्कूल जाना था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। इससे पहले ही दोनों बहनें हादसे का शिकार हो गई। परिजनों ने जब रोते हुए यह बताया तो आसपास के लोग यही कह रहे थे कि उनकी मौत ही उन्हें वहां पर खींचकर ले गई।