मेरठ से सटे हस्तिनापुर में तारापुर गांव से शनिवार को अगवा किए गए किसान परमजीत (35) की हत्या कर शव गन्ने के खेत में फेंक दिया गया। मेरठ में पुलिस ने सर्विलांस टीम की मदद से सोमवार को परमजीत का शव बरामद किया। परमजीत का शव तारापुर फतेहपुर प्रेम रोड पर बड़ी चकरोड के सामने एक फार्म के पास खेत में पड़ा मिला। बताया गया कि 48 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने शव को बरामद किया है।
Murder: दो गोली मारीं, तलवार से गला काटा और मुंह पर डाला तेजाब, अपहरण के बाद दोस्त को दी खौफनाक मौत
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रविवार को परिजनों ने थाने मेें परमजीत के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। सोमवार को हस्तिनापुर पुलिस और सर्विलांस टीम ने परमजीत के दोस्त पिंटू को हिरासत में ले सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया।
पुलिस ने बताया कि पिंटू की निशानदेही पर परमजीत का शव तारापुर से फतेहपुर प्रेम जाने वाली सड़क के किनारे गन्ने के खेत में मिला। पुलिस ने पिंटू से पूछताछ के बाद फतेहपुर प्रेम निवासी ओमबीर सिंह, नौबत और हरेंद्र को गिरफ्तार किया है। एसपी देहात केशव कुमार का कहना है कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि महिला से संबंध के चलते परमजीत की हत्या हुई है।
दोस्त पिंटू मुख्य आरोपी, गहनता से जांच करने में जुटी पुलिस
हत्या के बाद मुख्य आरोपी पिंटू समेत ओमबीर, नौबत और हरेंद्र हमदर्द बनकर परमजीत के परिवार के साथ ही घूमते रहे। जहां परमजीत का शव फेंका था वहां कोई न जाए इसके लिए भी वह उसके परिजनों को गुमराह करते रहे। सोमवार को परिवार को उन पर शक हुआ तो उन्होंने पिंटू से पूछताछ करने की बात पुलिस से कही।
सरदार परमजीत के अपहरण होने पर सिख समुदाय के लोगों में आक्रोश था। मामला गर्माने लगा तो पुलिस ने सर्विलांस से परमजीत, परिवार और दोस्तों के मोबाइल की सीडीआर सर्विलांस टीम से निकलवाई। इसमें पिंटू और ओमबीर की भूमिका संदिग्ध मिली। पुलिस की जांच में सामने आया कि पिंटू और परमजीत गहरे दोस्त थे।
पिंटू परमजीत के परिवार की एक महिला के संपर्क में था। परमजीत पिंटू के एक दोस्त के परिवार की महिला से बात करता था। इस आधार पर पुलिस ने पिंटू को हिरासत में लिया व सख्ती से पूछताछ की। कई घंटे तक पिंटू पुलिस को गुमराह करता रहा, लेकिन बाद में उसने सारी कहानी पुलिस को बता दी। पुलिस का कहना है कि उक्त दोनों महिलाओं से भी पूछताछ की जाएगी।
पिंटू ने किया भरोसे का कत्ल: गुरुदयाल
परमजीत के बड़े भाई गुरुदयाल सिंह उर्फ बूटा सिंह ने बताया कि वह तटबंध पर कार सेवा करते थे। भाई परमजीत ही घर और खेती का काम संभालता था। परमजीत व पिंटू की गहरी दोस्ती थी और वह एक-दूसरे के बिना खाना तक नहीं खाते थे। पिंटू ने विश्वास में लेकर परमजीत की हत्या कराई है। परमजीत की पत्नी और सात वर्षीय बच्चे का रो-रो कर बुरा हाल है। वहीं परमजीत की मां भी रोते हुए कह रही थी कि वह उसे दवा दिलाने तारापुर न गया होता तो शायद बेटा बच गया होता।