मुजफ्फरनगर में वीर बालाजी पेपर मिल में धमाके की आवाज तिगरी गांव तक सुनी गई। पहले ग्रामीणों ने भूकंप समझा, लेकिन बाद में पता चला कि फैक्टरी में हादसा हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि घरों के दरवाजे व खिड़कियां भी हिलने लगी थीं।
अंकित शर्मा की धमाके में जान चली गई। उसकी ड्यूटी रात दस बजे तक की थी लेकिन रात 11 बजे फोन बंद हो गया। घर पर बेटा, बेटी और पत्नी इंतजार करते रहे। सुबह पांच बजे अंकित के फोन से ही उसकी मौत की खबर आई।
रविवार तड़के लगभग पौने पांच बजे जोरदार धमाका हुआ। मजदूरों ने मिल में एक तरफ की छत व दीवार टूटी देखी तब मजदूर उधर दौड़े। मौके का मंजर देख उनके होश उड़ गए। मशीन में अंदर लगा एक चक्र लगभग बीस फीट दूर पड़ा था।
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शिफ्ट इंचार्ज की मौत के बाद बिलखते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दीवार और छत भी टूट गई। घायल मजदूर तड़प रहे थे। पुलिस को सूचना दी गई। घायलों को लेकर कर्मचारी अस्पताल पहुंचे और उनका उपचार कराया। उधर, हंगामे के दौरान नाराज ग्रामीणों ने कहा कि प्रदूषण फैल रहा है। मिल का संचालन बंद कराया जाना चाहिए।
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पेपर मिल में धमाके के बाद लगी भीड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शव ले जाने से रोका तो भाग गए मजदूर
ग्रामीणों का कहना था कि जिस समय वह फैक्टरी पहुंचे तो घायलों को पहले ही ले जाया जा चुका था। कुछ मजदूर अंकित शर्मा के शव को ले जाने के इरादे से मिल की बोलेरो गाड़ी में रख रहे थे। उन्हें परिजनों के आने तक शव ले जाने से ग्रामीणों ने रोक दिया। इसके बाद मजदूर व अन्य कर्मचारी वहां से भाग गए।
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पेपर मिल में धमाके के बाद क्षतिग्रस्त दीवार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पेपर मिल में नही पहुंचे मालिक
धरने पर मौजूद मृतक का भाई बब्लू आदि मुआवजे की मांग के साथ ही पेपर मिल मालिक को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे। लेकिन संचालकों ने थाने या चौकी पर बैठ कर वार्ता करने की बात कही। बाद में पुलिस चौकी पर बैठ कर समझौता हुआ।
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पेपर मिल में धमाका
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गांव में गम, बिलख उठे परिजन
रविवार शाम के समय परिजन शव लेकर घर पहुंचे तो परिजनों व गांव में शोक छा गया। सैकड़ों लोग मृतक के घर जा पहुंचे। मृतक के परिवार में पत्नी, एक बेटा व बेटी हैं। अंकित की ड्यूटी शनिवार दोपहर दो बजे से रात दस बजे तक थी। वह घर नहीं पहुंचा। उसका मोबाइल रात में 11 बजे बंद हो गया।