मेरठ में शाम के करीब सात बजे खंदक बाजार के भीड़ वाले इलाके में इदरीश के 50 गज के मकान में दो मासूम बच्चियों के अकीका के लिए चहल-पहल थी। अंदर भट्ठी पर खाना बनाया जा रहा था। इसी बीच गैस बंद हो गई। परिवार की महिला ने जैसे ही माचिस की तीली जलाई तो सिलिंडर ने आग पकड़ ली।
आग का गोला बना मकान: अंदर जिंदा जलती रहीं बेटियां, बाहर चीखते रहे बेबस परिजन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिगर के टुकड़ों को बचाने के लिए आग में कूदने को तैयार थीं माताएं
आग लगने के बार घर से बाहर आईं बच्चियों की माएं आग में कूदने को तैयार थीं। उन्हें किसी तरह लोगों ने संभाला। आखों के सामने दोनों बेटियां जिंदा जल गईं और परिवार बेबस रहा। आग बुझते ही परिवार के लोग मकान में घुस गए, लेकिन तब तक सामान के साथ दोनों मासूमों का कंकाल ही बचा था। खंदक बाजार की घनी आबादी में ये खौफनाक मंजर जिसने भी देखा उसके रोंगटे खड़े हो गए।
ननद-भाभी बेहोश
भीषण आग में अपनी-अपनी बेटियों को जलता देखकर जुनैद की पत्नी शहीना व उसकी ननद शैला बेहोश हो गई। होश में आईं तो दोनों मासूमों को बचाने के लिए अंदर घुसने की कोशिश करने लगीं। लोगों ने किसी तरह से उन्हें रोका।
रोते रहे पिता
परिवार के हर व्यक्ति का रो रोकर बुरा हाल था। रिश्तेदारी महिलाएं भी रोती बिलखती पहुंच गईं लेकिन तब तक दोनों बच्चियों की मां बदहवास थीं। दोनों सुध-बुध खो चुकी थीं। जुनैद और इमरान की हालत भी कुछ ठीक नहीं थी। रोते हुए वह बोल रहे थे कि मुझे बच्ची को दूध पिलाना है, वह बहुत देर से भूखी है।
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल, जान पर खेल सिलिंडर बाहर खींचा
इदरीश के घर में आग लगते ही कोहराम मच गया। आग की ऊंची ऊंची लपटें उठ रहीं थी। तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और जान जोखिम में डाल आग लगे सिलिंडर को बाहर खींच लाए। यहां लोगों ने बालू डालकर आग को बुझा दिया। मासूब बच्चियों को न बचा पाने का दर्द यहां हर किसी के चेहरे पर दिखा।
खंदक बाजार मिश्रित आबादी का इलाका है। जिस जगह इदरीश का घर बना है, वहां से चंद कदम की दूरी पर हिंदू परिवार भी रहते हैं। लगभग 80 प्रतिशत बाजार बंद हो चुका था। तभी आग लगने का शोर मच गया। लोग उस ओर दौड़ पड़े। परिवार के लोग बाहर खड़े चिल्ला रहे थे। पूछने पर पता चला कि नवजात बच्चियां अंदर हैं।