यूपी के मेरठ जिले में मिलावटी और नकली पेट्रोल-डीजल का काला कारोबार शहर के दो सफेदपोश पीढ़ी-दर-पीढ़ी कई दशकों से करते आ रहे हैं। अमर उजाला ने भी इस खेल का स्टिंग के जरिये कई बार खुलासा किया। लेकिन इन सफेदपोशों की सरकारी तंत्र में इतनी गहरी पैठ है कि कभी इनका कुछ नहीं बिगड़ा। साठगांठ में यह धंधा बढ़ता ही गया।
एक्सक्लूसिव: यहां दशकों से चल रहा नकली पेट्रोल-डीजल का काला कारोबार, अमर उजाला ने कई बार किया खुलासा
नकली व मिलावटी पेट्रोल-डीजल का धंधा करीब तीन दशक से हो रहा है। शहर के बड़े तेल माफिया इसके सरगना हैं। इनकी शह पर कुछ अन्य लोगों ने भी हाथ आजमाने शुरू किए। पेट्रोल बनाने का तरीका तो साल्वेंट के साथ पुराना है, लेकिन डीजल बनाने के तरीके में बदलाव आया है। पहले डीजल केरोसिन ऑयल से बनता था। क्योंकि सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर कंट्रोल रेट पर बिकने वाले इस तेल में बड़ा खेल था। यही तेल माफिया केरोसिन के भी वितरक थे। आपूर्ति विभाग के साथ प्रशासनिक अधिकारियों की साठगांठ से गरीबों तक साल में छह माह ही केरोसिन मिलता था। आधा तेल नकली डीजल बनाने में प्रयोग हो जाता था। लेकिन बदली सरकारी नीति के बाद केरोसिन की आपूर्ति में काफी कमी आ गई और भविष्य में और भी आने वाली है। लेकिन आज भी जिले में 4.60 लाख लीटर केरोसिन हर माह आता है। लेकिन इसका 70 प्रतिशत ही सरकारी सस्ते गल्ले को आवंटित होता है। बाकी 30 प्रतिशत गायब कर दिया जाता है। केरोसिन जो सरकारी रेट पर करीब 32 रुपये प्रति लीटर मिलता है उसे व अन्य क्रूड आयल से डीजल बनता है।
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पेट्रोल 50, डीजल 35 रुपये में तैयार
तेल माफिया और पेट्रोल पंप संचालकों को नकली तेल के धंधे में मोटी बचत है। नकली पेट्रोल 50-52 रुपये प्रति लीटर में तैयार कर माफिया इसे पेट्रोल पंप संचालक को 55-58 रुपये प्रति लीटर देता है। पेट्रोल पंप पर यह तेल वर्तमान दर (71 रुपये से ज्यादा) पर बिकता है। डीजल भी करीब 35 रुपये लीटर में तैयार होता है। जिसे माफिया 38-40 रुपये लीटर तक पेट्रोल पंप पर देते हैं। यही डीजल वर्तमान दर पर 65 रुपये से अधिक पर बिकता है।
कांडला बंदरगाह पर सेटिंग
गुजरात के कांडला बंदरगाह पर आयात होकर क्रूड ऑयल आता है। यह तेल सस्ता होता और इसमें केमिकल मिलाकर डीजल आसानी से तैयार हो जाता है। तेल माफियाओं ने यहां से इसके टैंकर मंगाने की पूरी सेटिंग की हुई है।
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...सत्ता के गलियारे तक मजबूत पकड़
शहर में दो बड़े तेल माफियाओं की आला अधिकारियों से सत्ता के गलियारे तक पकड़ किसी से छिपी नहीं है। शासन में हर विभाग में तमाम ऐसे बड़े अधिकारी इनके खास होने के साथ इनके काले कारोबार को पूरा संरक्षण देते हैं। वहीं, सरकार चाहे किसी की रहे, इन्हीं अधिकारियों के बूते यह हर सरकार में सत्ता में पकड़ बना लेते हैं। इन तेल माफियाओं के निजी कार्यक्रमों में ये आला अधिकारी और नेता अक्सर देखे जा सकते हैं।