यूपी के बागपत शहर में कांग्रेस नेत्री मुन्नी बेगम की हत्या सात साल पुरानी रंजिश में अंजाम दी गई। हत्यारोपी जाहिद उर्फ लंबू मुन्नी का फुफेरा भाई है। लंबू को शक था कि मुन्नी उसकी मुखबिरी करती है। यही शक रंजिश की वजह बना। मुन्नी पर पहला हमला 25 अप्रैल 2011 को पिचौकरा गांव में किया गया, लेकिन तब वह बच गई थी। आगे देखिए आज की घटना की सभी तस्वीरें...
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मौके पर पहुंची पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
बागपत जेल में बंद जाहिद उर्फ लंबू मूल रूप से दोघट थाना क्षेत्र के निरपुड़ा गांव का रहने वाला है। बागपत के अलावा मेरठ में भी उसके ठिकाने हैं। छह साल पहले वह राहुल खट्टा गैंग का शॉर्प शूटर रहा। मुन्नी बेगम से उसकी रंजिश सिर्फ इस वजह से हो गई कि लंबू को शक था कि पुलिस के सामने मुन्नी उनकी मुखबिरी करती है। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के पास उसकी आवाजाही रहती थी।
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कारतूस दिखाते पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि कांग्रेस में शामिल हो जाने के बाद यह आवाजाही और बढ़ी तो लंबू का शक गहरा गया। मुन्नी पर पहला हमला बिनौली थाना क्षेत्र के पिचौकरा गांव में 25 अप्रैल 2011 को किया गया। गोली लगने से मुन्नी घायल हो गई थी। उसके पति मोबीन ने मुकदमा दर्ज कराया। बाद में इस मामले में समझौता हो गया।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
दूसरा हमला केतीपुर के घर पर ही सितंबर 2012 में किया गया। मुन्नी ने इस मामले में भी मुकदमा दर्ज कराया। पिछले वर्ष मुन्नी बेगम के घर में आग लगा दी गई थी। परिवार के सदस्यों ने किसी तरह जान बचाई। तब भी जाहिद उर्फ लंबू पर ही मुकदमा दर्ज कराया गया था। सात साल से चली आ रही रंजिश में मुन्नी को आखिरकार मौत के घाट उतार दिया गया।
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मुन्नी सुरक्षा मांगती रही, अफसर टरकाते रहे
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हत्या के बाद मौजूद लोग
- फोटो : अमर उजाला
मुन्नी बेगम हत्या में पुलिस की अदूरदर्शिता भी सामने आई है। मुन्नी बेगम ने एक बार नहीं बल्कि सात साल में बार-बार पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई। कई बार उसे धमकी दिए जाने के मामले में सामने आए। लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी। पिचौकरा में हमले के बाद से ही मुन्नी और जाहिद लंबू के बीच रंजिश शुरू हो गई थी।