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बागपत Pics: पांच हजार साल पुरानी कब्रगाह, एतिहासिक खोज में मिले 2 रथ और नर कंकाल

Fri, 08 Jun 2018 12:00 PM IST
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, मदन बालियान, बागपत
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, मदन बालियान, बागपत Updated Fri, 08 Jun 2018 12:00 PM IST
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Baghpat Pics: 5 thousand years old cemetery, 2 chariots male skeletons found in historical search
उत्खनन में मिले ताबूत - फोटो : अमर उजाला

बागपत के सिनौली में उत्खनन के दौरान मिले रथ और ताबूत फिर से महाभारत कालीन संस्कृति की तरफ इशारा करते हैं। मान्यता है कि तब का वाक प्रस्थ ही आज का बागपत है। महाभारत के उद्योग पर्व में वर्णन है कि कौरवों से संधि वार्ता के लिए जाते वक्त भगवान श्रीकृष्ण वृक स्थल नामक जगह पर ठहरे थे।

Baghpat Pics: 5 thousand years old cemetery, 2 chariots male skeletons found in historical search
उत्खनन में मिले ताबूत - फोटो : अमर उजाला

इस क्षेत्र के आतिथ्य और वाक पटुता से खुश होकर श्रीकृष्ण ने क्षेत्र को वाक प्रस्थ नाम दिया। उत्खनन में पांच हजार साल पुरानी सभ्यता इस बात की पुष्टि करती है कि तब भी इस क्षेत्र के लोग तांबे और सोने के बड़े जानकार थे और महाभारत के धर्मयुद्ध का इस पूरे क्षेत्र से जुड़ाव रहा है।

Baghpat Pics: 5 thousand years old cemetery, 2 chariots male skeletons found in historical search
उत्खनन में मिले ताबूत

तमाम प्रमाण मौजूद हैं कि सिंधु सभ्यता के समय भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश आबाद था। सिनौली में साल 2005-06 हडप्पा कालीन कब्र गाह मिला तो स्वीकार्यता बढ़ गई। यमुना नदी से करीब 12 किमी दूर बसे सिनौली में कराए पुन: उत्खनन के दौरान तांबे की नक्काशी का शाही ताबूत, कब्र गाह में दो रथ और आठ नर कंकाल मिलने के साथ यहां पांच हजार साल पुरानी संस्कृति फिर से पुष्ट हुई है। जाहिर है कि तब भी इस क्षेत्र के लोग तांबे और सोने के जानकार थे। योद्धा का रथ, तलवार और हेलमेट से यह भी साबित होता है कि इस क्षेत्र के लोग लड़ाकू भी रहे हैं।

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Baghpat Pics: 5 thousand years old cemetery, 2 chariots male skeletons found in historical search
उत्खनन में मिले ताबूत - फोटो : अमर उजाला

एमएम कॉलेज मोदीनगर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. केके शर्मा बताते हैं कि महाभारत के उद्योग पर्व में लिखा है कि भगवान श्रीकृष्ण रथ पर सवार होकर मथुरा से यमुना नदी के किनारे होते कौरवों से संधि वार्ता के लिए हस्तिनापुर गए थे।

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उत्खनन में मिले ताबूत - फोटो : अमर उजाला

रास्ते में वह वृक स्थल नामक जगह पर रुके, यहां के लोगों ने उनका आदर सत्कार किया। भगवान श्रीकृष्ण यहां के लोगों की वाकपटुता, बहादुरी और ईमानदारी से इतने खुश हुए कि उन्होंने इस क्षेत्र का नाम वाक प्रस्थ रखा।

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