पांच हजार साल पहले भी महिलाएं श्रृंगार की बेहद शौकीन थी। शवादान गृह में महिला के कंकाल के पास तांबे का शीशा और हड्डियों से बना कंघा मिलने से इसकी पुष्टि हुई है। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के सिनौली में उत्खनन के बाद मिले अवशेषों से करीब पांच हजार साल पहले के ताम्रयुग की पुष्टि हो चुकी है।
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खुदाई में मिला शीशा
- फोटो : अमर उजाला
शवादान गृह में महिला के कंकाल के पास तांबे का शीशा और हड्डियों से बना कंघा मिला है, इससे स्पष्ट होता है कि पांच हजार साल पहले भी महिलाएं श्रृंगार की बेहद शौकीन थी। अंतिम संस्कार के दौरान इनके पास कंघा और शीशा रखा जाता है। इस काल के लोग भी पुनर्जन्म को मानते थे।
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खुदाई में मिला कंघा
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम ने सिनौली में उत्खनन कार्य किया। करीब 13 साल पहले सादिकपुर सिनौली में ही हड़प्पा कालीन सभ्यता के संकेत मिले, अब यहीं पर पांच हजार साल पहले के ताम्रयुग की पुष्टि हो चुकी है।
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महिला का कंकाल मिला
- फोटो : अमर उजाला
उत्खनन में मिट्टी के बर्तन, पुरानी तलवार, म्यान, तांबे के अवशेष के अलावा नर कंकाल भी मिले हैं। पांच हजार साल पुराने इतिहास की परतों को जोड़ने के लिए किए उत्खनन में कई महत्वपूर्ण प्रमाण मिले हैं। कब्र में लकड़ी और तांबे के टुकड़े मिले हैं। इतिहासकार डॉ. केके शर्मा बताते हैं कि खुदाई में एक महिला के कंकाल के पास हड्डियों से बनाया कंघा और तांबे का शीशा मिला है।
आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया के लिए यह बड़ी कामयाबी है। इससे पांच हजार साल पहले ताम्रयुग की पुष्टि होती है। यह भी साबित होता है कि महिलाएं श्रृंगार की बेहद शौकीन थी। पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एसके मंजुल के नेतृत्व में सिनौली में खुदाई का कार्य कराया गया।