सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधि...सबने धाड़ के साथ छल किया है। 20 हजार से अधिक आबादी जो शिवालिक की तलहटी और आसपास बसती है, वह एक अदद फायर ब्रिगेड स्टेशन और पेयजल के लिए तीन दशक से तरस रही है। इस दौरान तमाम दलों की सरकारें रहीं। सांसद, विधायक कब से वायदे करते आ रहे हैं लेकिन उन्हे धरातल पर नहीं उतार सके। पढ़िए उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद की ये रिपोर्ट-
दर्द भरी है तीन दशक की ये कहानी... अब तक तबाह हुए 1500 से ज्यादा आशियाने, पढ़िए- ये खास रिपोर्ट
तहसीलदार आशुतोष का दावा है कि 40 परिवार अग्निकांड में प्रभावित हुए हैं, जबकि सैकड़ों डेरे जलकर तबाह हुए हैं। नुकसान का सरकारी सर्वे होगा। वहीं बृहस्पतिवार को सांसद हाजी फजलुर्रहमान भी गांव पहुंचे और पीड़ितों की व्यथा जानी। बेहट विधायक नरेश सैनी भी पहुंचे। लगभग सभी दलों के जनप्रतिनिधियों ने मदद का आश्वासन दिया।
धाड़ क्षेत्र में तबाही के आंकड़े
2000 में 318 परिवार बेघर हुए। 22 मवेशियों एवं एक ग्रामीण की मौत
2001 में 414 मकान जले और 4 मवेशियों व एक ग्रामीण की मौत
2002 में 205 घर व दो मवेशी जले
2003 में 211 घर जले और 6 मवेशियों की मौत
2004 में 206 घर जले, 6 मवेशियों की मौत
2005 में 216 घर जले, 2 मवेशियों की मौत
2006 में 107 मकान और 23 मवेशी जले
2007 में 118 घर जले, 27 मवेशियों की मौत
2008 में 153 घर जले, पांच ग्रामीणों की मौत
2009 में घाड़ क्षेत्र में सबसे बड़ा अग्निकांड गांव कासमपुर में हुआ। 632 मकान जले, 103 मवेशियों और 5 ग्रामीणों की मौत
2010 में 20 मकान जले
2011 में 28 मकान जले, 4 मवेशियों की मौत
2015 में 39 घर जले
2016 में 37 मकान जले
2017 में 39 घर जले
धाड़ मजदूर मोर्चा वर्ष 1985 से धाड़ क्षेत्र में फायर स्टेशन की स्थापना की मांग करता आ रहा है। आंदोलन भी किए गए, लेकिन गूंगी और बहरी सरकारों ने नहीं सुनी। - चाणूराम, सह संयोजक धाड़ मजदूर मोर्चा
1997 से भारतीय किसान यूनियन से जुड़ा हूं। 23 साल से पेयजल संकट और अग्निकांड से होने वाले नुकसान के मुद्दे को लेकर आंदोलनरत हूं। लेकिन पेयजल और फायर स्टेशन के लिए कुछ नहीं किया गया। - मोहम्मद आलिम, ग्राम प्रधान नूरपुर भरावड़