लावड़-मसूरी मार्ग पर खरदौनी-महल के बीच डस्ट से भरे ट्रक ने घोड़ा बुग्गी में सामने की टक्कर मार दी और आधा किमी तक बग्गी को घसीटकर ले गया। बग्गी सवार चिल्लाते रहे। ट्रक चालक घायलों को भी घसीटकर ले जाता रहा। सीताराम का शव काफी दूर मिला। शव के चिथड़े उड़ गए। हादसे में चार लोगों की मौत हो गई।
Accident: ट्रक ने आधा किमी तक घसीटी घोड़ा-बग्गी, आगे निकलने की होड़ ने ली चार लोगों की जान
हादसे की जानकारी पर केंद्रीय राज्यमंत्री डाॅ. संजीव बालियान दिल्ली एयरपोर्ट से लौट आए और मृतकों के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी। उन्होंने मदद का भरोसा दिलाया। देर शाम सीताराम के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। तौफीक व अहजाद को सुपूर्द-ए खाक कर दिया गया। नवेद पुत्र लियाकत को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
आगे निकलने की होड़ ने ले ली चार लोगों की जान
दौराला की ओर से डस्ट से भरे ट्रक के अलावा एक ओर ट्रक जा रहा था। दोनों ट्रक लावड़ पहुंचने के बाद से ही आगे निकलने की होड़ को लेकर तेज रफ्तार पर थे। हादसे के दौरान डस्ट से भरा ट्रक गलत दिशा में पहुंचकर दूसरे ट्रक को ओवरटेक कर आगे निकलने का प्रयास कर रहा था। इसी बीच सामने से घोड़ा बुग्गी आ गई। जिस, कारण चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
ट्रक ने ट्रैक्टर में भी टक्कर मारी और एक खाली मैदान में जाकर घुस गया। पुलिस ने ट्रक की तलाशी ली। नंबर के आधार पर ट्रक सहारनपुर का बताया जा रहा है। हादसे में दो सगे भाई तौफीक व अहजाद की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों के पिता नवाब ने बताया कि उनके आठ बच्चे हैं। तौफीक व अहजाद ही बड़े थे। दोनों के कंधों पर ही परिवार के पालन पोषण की जिम्मेदारी थी। परिवार में एक साथ दो मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। नवाब ने बताया कि तौफीक की दो माह पहले ही महल गांव निवासी फरजाना से शादी हुई थी। पति की मौत की सूचना मिलते ही फरजाना बेहोश हो गई। फरजाना का रो-रोकर बुरा हाल था। इसके अलावा अहजाद की एक महीने बाद शादी होनी थी। वहीं दो महीने पहले भी मृतक तौफीक और अहजाद के चाचा याकूब की मौत हो गई थी। दो महीने के अन्दर परिवार में तीन मौत होने से सब सदमे में हैं।
सीताराम के परिवार में मचा कोहराम
सीताराम के दो बेटे प्रदीप व प्रवीण हैं। प्रदीप भी अपने पिता के साथ घोड़ा बग्गी बरात में ले जाने का कार्य करता है। प्रदीप ने बताया कि शुक्रवार को वह घोड़ा बग्गी लेकर मेरठ गया था। पिता सीताराम परीक्षितगढ़ गए थे।