फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Mahashivaratri: यूपी की 'छोटी काशी' में अद्भुत शिवलिंग... सीएम योगी भी कर चुके हैं अभिषेक; ये है मान्यता

Tue, 25 Feb 2025 02:38 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 25 Feb 2025 02:38 PM IST
सार

लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ को छोटी काशी कहा जाती है। यहां पौराणिक शिव मंदिर है, जिसमें अद्भुत शिवलिंग स्थापित हैं। यहां का महात्म्य पुराणों और लोक कथाओं में मिलता है। सीएम योगी भी यहां आकर भगवान शिव का जलाभिषेक कर चुके हैं। 

विज्ञापन
Mahashivaratri 2025 Gola Gokarnath Chhoti Kashi is the center of devotion towards Shiva
22 फरवरी की सीएम योगी यहां आए थे और पौराणिक मंदिर में पूजा की। - फोटो : अमर उजाला

लखीमपुर खीरी में छोटी काशी के नाम से विख्यात गोला गोकर्णनाथ का पौराणिक शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां का महात्म्य पुराणों और लोक कथाओं में मिलता है। यहां महाशिवरात्रि पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है। हरिद्वार, कछला घाट से गंगाजल लाकर भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इस पौराणिक मंदिर को लेकर मान्यता है कि भगवान शिव ने यहां मृग रूप में विचरण किया था। वराह पुराण में वर्णित है कि भगवान शिव वैराग्य उत्पन्न होने पर यहां के वन क्षेत्र में भ्रमण करते हुए, रमणीय स्थल पाकर यहीं रम गए। ब्रह्मा, विष्णु और इंद्र को चिंता हुई और वह उन्हें ढूंढते हुए आए तो यहां वन प्रांत में एक अद्भुत मृग को सोते देखकर समझ गए कि यही शिव हैं। वे जैसे ही उनके निकट गए तो आहट पाकर मृग भागने लगा।

Mahashivaratri 2025 Gola Gokarnath Chhoti Kashi is the center of devotion towards Shiva
गोला गोकर्णनाथ, लखीमपुर - फोटो : instagram

पौराणिक प्रसंग के अनुसार देवताओं ने उनका पीछा कर उनके सींग पकड़ लिए तो सींग तीन टुकड़ों में विभक्त हो गया। सींग का मूल भगवान विष्णु ने यहां स्थापित किया, जो गोकर्ण नाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। सींग का दूसरा टुकड़ा ब्रह्मा जी ने बिहार के श्रृंगेश्वर में स्थापित किया। तीसरा टुकड़ा देवराज इंद्र ने अमरावती में स्थापित किया। यहां के महात्म्य का वर्णन शिव पुराण, वामन, पुराण, कूर्म पुराण, पद्म पुराण और स्कंद पुराण में भी मिलता है। 

Mahashivaratri 2025 Gola Gokarnath Chhoti Kashi is the center of devotion towards Shiva
गोला के पौराणिक शिव मंदिर में भक्तों की भीड़ (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

पौराणिक शिव मंदिर से जुड़ी एक लोक मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में भगवान शिव रावण की तपस्या से प्रसन्न हुए और रावण भगवान शिव को अपने साथ लंका ले जाने लगा। भगवान शिव ने शर्त रखी कि उन्हें रास्ते में कहीं भी रखा, तो वह उस स्थान से नहीं जाएंगे। जब रावण गोला गोकर्णनाथ के पास पहुंचा तो वह लघुशंका के लिए रुका। रावण एक चरवाहे को इस हिदायत के साथ शिवलिंग देकर लघुशंका के लिए चला गया कि वह शिवलिंग भूमि पर नहीं रखेगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Mahashivaratri 2025 Gola Gokarnath Chhoti Kashi is the center of devotion towards Shiva
गोला के पौराणिक मंदिर में शिवलिंग - फोटो : अमर उजाला
काफी देर तक वापस न आने पर चरवाहे ने भगवान शिवलिंग को भूमि पर रख दिया। वापस लौटने पर रावण ने शिवलिंग उठाने की कोशिश की मगर नहीं उठा सका। इस पर गुस्से से अपने अंगूठे से शिवलिंग को भूमि में दबा दिया। मान्यता है, कि गोला के पौराणिक शिव मंदिर में स्थापित शिवलिंग में रावण के अंगूठे का निशान आज भी मौजूद है।
विज्ञापन
Mahashivaratri 2025 Gola Gokarnath Chhoti Kashi is the center of devotion towards Shiva
गोला का पौराणिक शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
गोला में बन रहा शिव मंदिर कॉरिडोर 
वर्ष 2016 में आवास विकास योजना के तहत एक करोड़ 10 लाख रुपए की लागत से जीर्णोद्धार कराया गया था। वहीं वर्ष 2014 में शिव सेवार्थ समिति ने शिव भक्तों के सहयोग से तीर्थ के मध्य विशालकाय भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित कराई थी। अब इस धार्मिक स्थल को कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की कवायद चल रही है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed