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Vikas Dubey News: आठ पुलिसकर्मियों पर लटकी बर्खास्तगी की तलवार, छह का होगा डिमोशन, छिनेगी थानेदारी
Sun, 22 Nov 2020 09:05 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 22 Nov 2020 09:05 AM IST
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए बिकरू कांड के अपराधी दहशतगर्द विकास दुबे से यारी निभाने में आठ पुलिस कर्मियों पर बर्खास्तगी की तलवार लटकी है। जांच कर रही एसआईटी ने आठ पर धारा 14(1) (बड़ा दंड) की कार्रवाई की संस्तुति की है। छह के डिमोशन होने की संभावना है। उनके खिलाफ टीम ने धारा 14(2) (लघु दंड) की संस्तुति की है।
विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
वहीं 23 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई होनी है। अब एडीजी जोन एसआईटी जांच पर आगे की विभागीय कार्रवाई करेंगे। बिकरू कांड में एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर उत्तर प्रदेश शासन के सचिव तरुण गाबा ने डीजीपी और एडीजी कानपुर को जांच में दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
शासन द्वारा भेजे गए आदेश को कानपुर में अधिकारियों ने संज्ञान में लिया है। उन्होंने शासन से उस रिपोर्ट की मांग की है, जिसमें एसआईटी ने यह बताया है कि किस पुलिसकर्मी पर क्या आरोप तय किया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद अधिकारी द्वारा आरोपी पुलिस कर्मियों को नोटिस देकर जवाब मांगा जाएगा। उसके बाद कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे होगी कार्रवाई
पुलिस नियमावली के अनुसार वृहद दंड के तहत दोषी पाए जाने पर न्यूनतम सजा तीन साल के लिए न्यूनतम वेतनमान पर भेजे जाने का प्रावधान है। इसके अलावा इंस्पेक्टर व दरोगा रैंक के अधिकारी को तीन साल तक थानेदारी नहीं मिलेगी और दस साल तक प्रमोशन नहीं होगा।
पुलिस नियमावली के अनुसार वृहद दंड के तहत दोषी पाए जाने पर न्यूनतम सजा तीन साल के लिए न्यूनतम वेतनमान पर भेजे जाने का प्रावधान है। इसके अलावा इंस्पेक्टर व दरोगा रैंक के अधिकारी को तीन साल तक थानेदारी नहीं मिलेगी और दस साल तक प्रमोशन नहीं होगा।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
वहीं इसके तहत अधिकतम सजा बर्खास्तगी है। वहीं लघु दंड के दोषियों को तीन साल तक थानेदारी न मिलने व दस साल तक प्रमोशन न मिलने की सजा मिलेगी। अधिकतम डिमोशन हो सकता है। हालांकि इससे पहले डिप्टी एसपी रैंक के एक अधिकारी के सामने आरोपी पुलिसकर्मी अपना पक्ष रखेंगे, बहस होगी और उसके बाद सजा सुनाई जाएगी।