यूपी के फतेहपुर जिले के थरियांव में अवैध संबंध के शक में भाभी और दोस्त का हत्यारोपी दिलदार कुरैशी बहन की जान बचने पर खुश होने की जगह मातम मना रहा है। वह बोला कि किसी तरह उसे चंद घंटे मिल जाएं तो बहन को अल्लाह के पास पहुंचा दूं। पुलिस को दिलदार का आपराधिक इतिहास भी मिला है। पुलिस ने उसे शनिवार को कोर्ट में पेश किया। इसके बाद उसे जेल भेज दिया है।
थरियांव थाना क्षेत्र के हसवा कस्बा चौधराना मोहल्ले के दिलदार ने अवैध संबंध पर शुक्रवार को नमाज के बाद दोस्त फैजान कुरैशी और भाभी जिकरा परवीन की चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी। बहन मन्नू पर भी एक के बाद एक चाकू से कई वार कर जानलेवा हमला किया था। वारदात के बाद खुद पुलिस चौकी में आत्मसमर्पण किया था।
2 of 17
आरोपी दिलदार की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस उसे रात को थाने ले गई। यहां पुलिस अधिकारियों ने कई घंटे तक पूछताछ की। पुलिस ने जब दिलदार को बताया कि बहन जिंदा है। यह सुनने के बाद दिलदार के चेहरे से हवाइयां उड़ गईं। चेहरे से उसका चेहरा लाल हो गया। दिलदार बोला उसने तो तीनों को जान से मारा था बहन कैसे बच गई। उसे अपने किए का जरा भी पछतावा नहीं है।
3 of 17
अस्पताल में भर्ती घायल छोटी बहन मन्नू
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी कानपुर-प्रयागराज हाईवे से दिखा चाकू बरामद किया है। खून से सनी जैकेट और मफलर की बरामद किया है। जैकेट पर लगा खून फैजान का है। माना जा रहा है कि फैजान की हत्या के बाद जानकर वह जैकेट फेंककर घर की ओर भागा होगा।
4 of 17
जिकरा के रोते-बिलखते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आरोपी के खिलाफ 2021 में गोकशी, 2021 अगस्त में पुलिस पर फायरिंग, 2021 में आर्म्स एक्ट, 2022 में गैंगस्टर की प्राथमिकी दर्ज है। प्रभारी निरीक्षक राजेंद्र सिंह ने बताया कि हत्या और हत्या की कोशिश के प्रयास में दिलदार जेल गया है।
5 of 17
घटनास्थल पर आरोपी दिलदार के घर जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस की चूक आई सामने, नहीं की कार्रवाई
दिलदार के खिलाफ पूर्व में कई संगीन अपराध दर्ज हैं। दिलदार और उसके अन्य भाइयों पर भी गोकशी की प्राथमिकी दर्ज हैं। बड़ा भाई बल्लू जो जिकरा का पति है वह थाने का हिस्ट्रीशीटर है। इन दिनों थरियांव समेत कई क्षेत्रों में गोकशी को लेकर भी मामला गर्म है। इसके बाद भी पुलिस ऐसे अपराधियों पर कार्रवाई नहीं करती है। पुलिस ने दिलदार पर भी ठोस कार्रवाई करती तो शायद आज फैजान और जिकरा जिंदा होती।