विधायक कुलदीप सेंगर से दुष्कर्म की शिकार हुई पीड़ता ने न्याय की लड़ाई में तमाम संघर्षों का सामना करना पड़ा। इस दौरान उसने परिवार के कई सदस्यों को हमेशा के लिए खो दिया। पिता और दादी के बाद उसने उस चाची और मौसी को भी खो दिया, जिन्होंने उसे न्याय की लड़ाई के लिए हौसला दिया।
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विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
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वहीं, पीड़िता ने रायबरेली में 28 जुलाई को हुए सड़क हादसे के 16 दिन पहले 12 जुलाई 2019 को मुख्य न्यायाधीश, उत्तर प्रदेश के डीजीपी, डीआईजी और सीबीआई प्रमुख सहित जिले के अन्य अधिकारियों से विधायक से अपनी जानमाल का खतरा जताया था।
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उन्नाव कांड में पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को होगी सजा
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प्रार्थनापत्र में उसने लिखा था कि पेशी के लिए आते-जाते समय और गांव में भी उसे तमाम धमकियां मिलती रहीं। पीड़िता, उसकी मां और चाची ने संयुक्त रूप से एक प्रार्थनापत्र सीजेआई, एसपी, सीबीआई, डीजीपी, आईजी, प्रमुख सचिव गृह और न्यायाधीश को भी भेजा था।
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कुलदीप सेंगर
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शिकायती पत्र में बताया था कि 7 जुलाई को सुबह करीब नौ बजे विधायक के भाई कई अन्य लोगों के साथ उसके घर के बाहर आए और धमकाते हुए सुलह का दबाव बनाया।
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फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
इसके एक दिन बाद 8 जुलाई को दुष्कर्म के मुकदमे में सह आरोपी शशि सिंह के पति ने घर पहुंचकर सुलह न करने पर पूरे परिवार को जेल भेज देने की धमकी दी। इन गंभीर आरोपों और शिकायतों के बाद भी पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया था।