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बाहुबली कुलदीप सेंगर की धमकियों के बाद भी नहीं झुकी पीड़िता, 30 माह के अंदर परिवार में चार की मौत

Tue, 17 Dec 2019 12:08 PM IST
शाहरुख खान ब्यूरो, अमर उजाला, उन्नाव
ब्यूरो, अमर उजाला, उन्नाव Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 17 Dec 2019 12:08 PM IST
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Unnao case Victim did not get scared  after threats from MLA Kuldeep Sengar
बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
विधायक कुलदीप सेंगर से दुष्कर्म की शिकार हुई पीड़ता ने न्याय की लड़ाई में तमाम संघर्षों का सामना करना पड़ा। इस दौरान उसने परिवार के कई सदस्यों को हमेशा के लिए खो दिया। पिता और दादी के बाद उसने उस चाची और मौसी को भी खो दिया, जिन्होंने उसे न्याय की लड़ाई के लिए हौसला दिया। 



 
Unnao case Victim did not get scared  after threats from MLA Kuldeep Sengar
कुलदीप सेंगर - फोटो : अमर उजाला
रायबरेली में हुए हादसे में पीड़िता की तो जान बच गई लेकिन, विधायक और उसके गुर्गों की धमकियों के बाद न्याय की लड़ाई में उसका साथ देने वाले वकील अभी भी कोमा में है। 4 जून 2017 को 17 साल की उम्र में किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। किशोरी को अगवा कर अलग-अलग स्थानों पर रखा गया। आठ महीने बाद उसको पुलिस ने खोज लिया था। 
Unnao case Victim did not get scared  after threats from MLA Kuldeep Sengar
kuldeep sengar - फोटो : अमर उजाला
मां ने थाने में दिए प्रार्थनापत्र में धियक कुलदीप सिंह सेंगर द्वारा पड़ोस की एक महिला शशि सिंह के जरिए बहाने से घर बुलाकर दुष्कर्म की शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 11 जून 2017 को पीड़िता ने न्यायालय की शरण ली और 156/3 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन पुलिस ने विवेचना में विधायक और सह आरोपी महिला का नाम हटा दिया। 
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Unnao case Victim did not get scared  after threats from MLA Kuldeep Sengar
फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
इसके बावजूद पीड़िता अपनी चाची (रायबरेली हादसे में मृत) के दिए हौसले के सहारे अपनी लड़ाई लड़ती रही। न्याय की इस लड़ाई में उसने अपने पिता को खो दिया। विधायक के छोटे भाई ने उसे बेरहमी से पीटा और उल्टा मुकदमा दर्ज करा दिया। बाद में न्यायिक अभिरक्षा में उनकी मौत हो गई। वह फिर भी नहीं डरी और बाहुबली विधायक के खिलाफ लड़ाई जारी रखी। 
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Unnao case Victim did not get scared  after threats from MLA Kuldeep Sengar
कुलदीप सेंगर - फोटो : सोशल मीडिया
इस लड़ाई में कदम मिलाकर साथ दे रहे चाचा को नवंबर 2018 को 19 साल पुराने एक मुकदमे में न्यायालय से जारी हुए गैर जमानती वारंट पर पुलिस ने जेल भेज दिया। तब से वह जेल में हैं। बेटे के जेल जाने के गम में सीबीआई के गवाहों में शामिल किशोरी की दादी की सदमे में मौत हो गई। पीड़िता फिर भी पीछे नहीं हटी। 
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