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उन्नाव दुष्कर्म कांड: न्याय की लड़ाई में पीड़िता ने 30 माह के भीतर पिता, दादी, चाची और मौसी को खोया

Tue, 17 Dec 2019 12:07 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 17 Dec 2019 12:07 PM IST
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kuldeep sengar misdeed case unnao, Four dead in victims family within 30 months
उन्नाव दुष्कर्म मामला - फोटो : अमर उजाला
उन्नाव में विधायक कुलदीप सेंगर से दुष्कर्म की शिकार हुई पीड़ता ने न्याय की लड़ाई में तमाम संघर्षों का सामना करना पड़ा। इस दौरान उसने परिवार के कई सदस्यों को हमेशा के लिए खो दिया। पिता और दादी के बाद उसने उस चाची और मौसी को भी खो दिया, जिन्होंने उसे न्याय की लड़ाई के लिए हौसला दिया।




रायबरेली में हुए हादसे में पीड़िता की तो जान बच गई लेकिन, विधायक और उसके गुर्गों की धमकियों के बाद न्याय की लड़ाई में उसका साथ देने वाले वकील अभी भी कोमा में है। 4 जून 2017 को 17 साल की उम्र में किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। किशोरी को अगवा कर अलग-अलग स्थानों पर रखा गया।
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उन्नाव दुष्कर्म मामला - फोटो : अमर उजाला
आठ महीने बाद उसको पुलिस ने खोज लिया था। मां ने थाने में दिए प्रार्थनापत्र मेें विधायक कुलदीप सिंह सेंगर द्वारा पड़ोस की एक महिला शशि सिंह के जरिए बहाने से घर बुलाकर दुष्कर्म की शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 11 जून 2017 को पीड़िता ने न्यायालय की शरण ली और 156/3 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन पुलिस ने विवेचना में विधायक और सह आरोपी महिला का नाम हटा दिया।
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उन्नाव दुष्कर्म मामला - फोटो : अमर उजाला
इसके बावजूद पीड़िता अपनी चाची (रायबरेली हादसे में मृत) के दिए हौसले के सहारे अपनी लड़ाई लड़ती रही। न्याय की इस लड़ाई में उसने अपने पिता को खो दिया। विधायक के छोटे भाई ने उसे बेरहमी से पीटा और उल्टा मुकदमा दर्ज करा दिया। बाद में न्यायिक अभिरक्षा में उनकी मौत हो गई।
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उन्नाव दुष्कर्म मामला - फोटो : अमर उजाला
वह फिर भी नहीं डरी और बाहुबली विधायक के खिलाफ लड़ाई जारी रखी। इस लड़ाई में कदम मिलाकर साथ दे रहे चाचा को नवंबर 2018 को 19 साल पुराने एक मुकदमे में न्यायालय से जारी हुए गैर जमानती वारंट पर पुलिस ने जेल भेज दिया। तब से वह जेल में हैं।
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उन्नाव दुष्कर्म मामला - फोटो : अमर उजाला
बेटे के जेल जाने के गम में सीबीआई के गवाहों में शामिल किशोरी की दादी की सदमे में मौत हो गई। पीड़िता फिर भी पीछे नहीं हटी। वकील की मदद और चाची के हौसले के बूते उसने अपनी लड़ाई जारी रखी। इस दौरान उसे व उसके परिवार को कई बार धमकियां भी मिलीं, लेकिन वह डटी रही। जब वह अधिवक्ता के साथ उन्हीं की कार से रायबरेली जेल में बंद चाचा से मिलने जा रही थी तभी थाना गुरुबक्शगंज में रहस्यमय सड़क हादसे में अपनी चाची और मौसी को भी खो दिया। हादसे में घायल उसके वकील की भी हालत गंभीर है।
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