उत्तर प्रदेश के कन्नौज में मेंहदीघाट पर गंगा नदी में मछलियों के मरने का कारण शुगर मिल का शीरा (मोलासेस) होने की पुष्टि हो गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने इसके लिए गंगा में मिलने वाली सहायक नदी गर्रा में मैसर्स अवध शुगर एंड एनर्जी लिमिटेड की रोजा इकाई से रसायन अपशिष्ट (शीरे) का रिसाव होने को कसूरवार ठहराया है।
ये शीरा शाहजहांपुर में काल्हा नाला के रास्ते गर्रा नदी और वहां से गंगा नदी में पहुंच गया। इकाई के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया गया है।
सीपीसीबी ने कहा है कि सबसे पहले गर्रा नदी में ही जलीय जीवों के मरने की बात सामने आई थी। इसके बाद कन्नौज के मेंहदीघाट पर भी इसी तरह की शिकायत आई। रोजा इकाई ने प्लांट के पीछे नदी की तरफ शीरे को एकत्रित किया था, जो रिसकर काल्हा नाला के रास्ते गर्रा और फिर गंगा में पहुंच गया। इसकी वजह से नदी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई और जलीय जीवों की मृत्यु हो गई।
पंजाब के बाद यूपी में भी वहीं गलती
हाल ही में पंजाब में ब्यास नदी में दो शुगर मिलों का शीरा रिसने से जलीय जीवों की मौत हो गई थी। इसके बाद सीपीसीबी ने सभी राज्यों के शुगर मिलों को शीरे के एकत्र करने की जगह को सुरक्षित बनाने का आदेश दिया गया था। लेकिन अब यूपी में मिला ये पहला मामला दिखा रहा है कि यहां भी सुधार नहीं है।