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उन्नाव की बहू से दिल्ली की सीएम तक कुछ ऐसा रहा शीला दीक्षित का सफर, ससुराल ने रोका था संसद का रास्ता

Sun, 21 Jul 2019 04:42 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 21 Jul 2019 04:42 AM IST
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Sheila Dikshit's journey from Unnao's daughter-in-law to Delhi's CM
वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी के तत्कालीन जिलाध्यक्ष हरिप्रसाद कुरील, पूर्व विधायक भगवती सिंह विशारद व जिले के अन्य नेताओं के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति तैयार करतीं शीला दीक्षित। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
उन्नाव की बहू व दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का अपनी ससुराल से सांसद बनकर दिल्ली पहुंचने के रास्ते में उन्नाव के मतदाताओं ने पानी फेर दिया था। वर्ष 1996 का लोकसभा चुनाव में उन्होंने तिवारी कांग्रेस से लड़ा लेकिन अपनों की बेरुखी ने उनके सपने को तोड़ दिया।


 
Sheila Dikshit's journey from Unnao's daughter-in-law to Delhi's CM
शीला दीक्षित (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
वह लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं। उनकी इस सफलता पर जिले के लोगों का सीना चौड़ा रहा। शनिवार को उनके निधन से जिले के लोगों गहरा धक्का लगा है। शीला दीक्षित की ससुराल फतेहपुर चौरासी ब्लॉक के ऊगू कस्बे में है। केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री और बाद में राज्यपाल रहे दिवंगत उमाशंकर दीक्षित के बेटे आईएएस विनोद दीक्षित से शीला दीक्षित की शादी हुई थी।

 
Sheila Dikshit's journey from Unnao's daughter-in-law to Delhi's CM
शीला दीक्षित को माला पहनाते कांग्रेसी नेता (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
इमरजेंसी से पहले शीला दीक्षित का ज्यादा समय अपनी ससुराल उन्नाव में ही बीता। ट्रेन में सफर के दौरान उनके पति विनोद दीक्षित का देहांत हो गया था। अपने ससुर उमाशंकर दीक्षित की राजनीतिक विरासत संभालने के लिए शीला दीक्षित पहली बार 1984 में कन्नौज से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचीं थीं। हालांकि 1989 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

 
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Sheila Dikshit's journey from Unnao's daughter-in-law to Delhi's CM
एक जनसभा के दौरान शीला दीक्षित (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
इसके बीच कांग्रेस पार्टी में दो फाड़ हो गए थे। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने अखिल भारतीय इंदिरा कांग्रेस (तिवारी) का गठन किया था। शीला दीक्षित ने 1996 में कन्नौज के बजाय अपनी ससुराल उन्नाव लोकसभा क्षेत्र से तिवारी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

 
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Sheila Dikshit's journey from Unnao's daughter-in-law to Delhi's CM
कांग्रेसी नेताओं के साथ शीला दीक्षित (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
उन्हें केवल 11037 वोट मिले थे और वह पांचवें स्थान रही थीं। इसके बाद वह 1998 में वह दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं और लगातार तीन बार देश की राजधानी की सत्ता संभाली। दिल्ली में रहते हुए भी वह उन्नाव के लोगों से उनका खास लगाव रहा। यहां से जाने वाले लोगों से वह मिलतीं थीं। गांव और घर की खूब बातें भी करती थीं।

 
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