शनि देव के पूजन से जीवन के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। 15 मई यानी मंगलवार को शनिदेव का जन्मोत्सव शनि जयंती मनाई जाएगी। इस वर्ष जयंती पर पूजन विशेष फलदायी है क्योंकि इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग लग रहा है, जो दिनभर रहेगा। साथ ही सावित्री वट पूजा व्रत और भौमवती अमावस्या का संयोग भी बन रहा है।
शुभ मुहूर्त में करें पूजन
15 मई को सुबह 10:57 बजे से सर्वार्थसिद्धि योग लग रहा है, जो दिनभर रहेगा। इस योग में किए गए पूजन का अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।
शनि की महादशा, साढ़े साती की शांति के लिए पूजन
विद्वानों की माने तो शनि की महादशा, साढ़े साती और ढैय्या की शांति के लिए अति उत्तम मुहूर्त है। इस दौरान शनिदेव का पूजन और दान करने से ग्रह की पीड़ा शांत हो जाएगी।
अमावस्या को पड़ रही जयंती
ज्योतिषाचार्य व पं. नरेंद्र दीक्षित ने बताया कि इस बार शनि जयंती ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पड़ रही है। मंगलवार को भरणी नक्षत्रा, शोभन योग, चतुष्पदकरण तथा मेष राशि मेंचंद्रमा की उपस्थिति शुभ संयोग बना रहे हैं। ऐसे में शनि की साढ़े साती, ढैया, महादशा से पीड़ित जातक सर्वार्थसिद्धि योग में शनिदेव को पूजन और दान से प्रसन्न कर सकते हैं। इस बार ज्येष्ठ मास में अधिक दिन हैं इसलिए अमावस्या का महत्व अत्यंत खास है।
ऐसे करिए शनि महाराज को प्रसन्न
शनि के वैदिक तथा बीज मंत्र ऊं खां खीं खूं स: मंदाय स्वाहा बोलकर एक या 21 माला करें। इसके अलावा मंदिर में शनिदेव का तेल से अभिषेक करें। इससे शुभ फल मिलेगा।