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शरीर पर भस्म लपेट साधु खुले आसमान के नीचे अपने चारों ओर कंडों की आंच जलाकर बैठते हैं, जानिए क्यों
Fri, 10 Jan 2020 07:43 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
डिजिटल डेस्क, अमर उजाला, फर्रूखाबाद
डिजिटल डेस्क, अमर उजाला, फर्रूखाबाद
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 10 Jan 2020 07:43 PM IST
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मेला रामनगरिया में गंगा किनारे मीलों तक फैले टेंट
- फोटो : अमर उजाला
हठयोग से आखिर धरतीवासियों को क्या फायदा होता है? इन सवालों का जवाब पाते ही आप हैरान रह जाएंगे। एक इंसान जो अपने परिवार को छोड़कर, सारी रिश्ते-नाते तोड़कर ईश्वर की भक्ति में इस कदर लीन हो जाता है कि उसे खुद का भी कोई ठिकाना नहीं होता। साधु बनने के बाद इंसान आम जनमानस की सुख-समृद्घि की कामना के लिए हठ योग करता है। धुनी रमां कर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया जाता है।
मेला रामनगरिया में गंगा किनारे मीलों तक फैले टेंट, यहीं धुनि रमाएंगे साधु संत
- फोटो : अमर उजाला
महंत बताते हैं कि ज्येष्ठ माह के दशहरे से कार्तिक माह की चौथ तक साधु मेघ-डंबर अनुष्ठान करते हैं। इसके तहत वह 24 घंटे खुले आसमान के नीचे बैठकर भगवान से वर्षा कराने की कामना करते हैं। कार्तिक माह से माघ तक यह साधु कभी गंगा में खड़े होकर तो कभी 300 मटके ठंडे जल से स्नान कर प्रकृति के विपरीत जाकर अपने शरीर को कष्ट देते हैं। साधुओं की साज सज्जा भस्म लपेटने से होती है। धूनी पर बैठकर साधु चंदन, रोली व बंधन से श्रृंगार करते हैं।
साधुओं अपने चारों ओर कंडों पर वैदिक रीति से पूजन करते हैं इसके बाद कपड़े से अपने आप को ढककर अपने इष्ट के ध्यान में खो जाते हैं। फर्रुखाबाद के पंचाल घाट पर माघ महीने में लगने वाले मेला श्रीरामनगरिया में कल्पवास के लिए साधु संतों का आना शुरू हो गया है। पौष (पूस) महीने की पूर्णिमा के स्नान के साथ कल्पवास शुरू हो जाएगा। अन्य प्रदेशों से पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिये प्रशासन ने मेले की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
साधुओं अपने चारों ओर कंडों पर वैदिक रीति से पूजन करते हैं इसके बाद कपड़े से अपने आप को ढककर अपने इष्ट के ध्यान में खो जाते हैं। फर्रुखाबाद के पंचाल घाट पर माघ महीने में लगने वाले मेला श्रीरामनगरिया में कल्पवास के लिए साधु संतों का आना शुरू हो गया है। पौष (पूस) महीने की पूर्णिमा के स्नान के साथ कल्पवास शुरू हो जाएगा। अन्य प्रदेशों से पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिये प्रशासन ने मेले की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
मां गंगा को मेला रामनगरियां का आमंत्रण पत्र देते साधु संत एवं एसडीएम
- फोटो : अमर उजाला
कल्पवासियों को अस्थाई राशनकार्ड और अस्थाई थाना बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। फर्रूखाबाद में पंचाल घाट पर मेला श्रीरामनगरिया सैकड़ों वर्षों से लगता चला आ रहा है। इसमें साधु-सन्यासियों से लेकर गृहस्थ तक माघ महीने में भागीरथी के तट पर कल्पवास पर भगवान की आराधना करते हैं। पौष (पूस) की पूर्णिमा से माघ की पूर्णिमा तक कल्पवास चलता है। साधुओं ने कुटिया बनाना शुरु कर दिया है।
राजस्थान के भीलपाड़ा के दानेश्वर धाम से आए नागा साधु बाबा रामदास ने बताया कि 1984 से यहां कल्पवास करने आ रहे हैं। मेले में साल दर साल आधुनिकता बढ़ने से आराधना में व्यवधान बढ़ता है। पहले करीब एक सैकड़ा झोपड़ियों में लोग मेला क्षेत्र में कल्पवास करते थे। तब माइक और साउंड का शोर नहीं होता था। साधु संत पहले रोशनी के लिए कल्पवासी लालटेन का प्रयोग करते थे।
राजस्थान के भीलपाड़ा के दानेश्वर धाम से आए नागा साधु बाबा रामदास ने बताया कि 1984 से यहां कल्पवास करने आ रहे हैं। मेले में साल दर साल आधुनिकता बढ़ने से आराधना में व्यवधान बढ़ता है। पहले करीब एक सैकड़ा झोपड़ियों में लोग मेला क्षेत्र में कल्पवास करते थे। तब माइक और साउंड का शोर नहीं होता था। साधु संत पहले रोशनी के लिए कल्पवासी लालटेन का प्रयोग करते थे।
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मेला रामनगरिया का प्रवेश द्वार
- फोटो : अमर उजाला
कल्पवासियों की दिनचर्या केवल भगवत भजन ही थी अब लाइट की चकाचौंध, जगह- जगह पांडालों में लगे माइकों से निकलने वाला शोर पूजा करने में विघ्न पड़ता है। उन्होंने बताया कि अबकी बार नागा साधु अपने अखाडे़ को सजाने संवारने के लिए पहले से ही डेरा जमाएंगे। इस बार अन्य जिलों से 18 युवा नागा संन्यासी अखाडे़ में आकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
मेले के दौरान निकलने वाली शोभा यात्राओं में 56 तरह के हथियारों से करतब दिखाया जाएगा। पटाबाजी, बल्लम, फरसा, कांता, दोधारू, चौमुखी, चक्र, वननेती, धनुष बाण आदि से सुसज्जित साधु अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगे। चौरासी परिक्रमा बद्रिका वन के कुंदन बाबा वर्ष 1999 से पांचालघाट पर कल्पवास करने के लिए आ रहे हैं। कुंदन बाबा बताते हैं कि, मेले की सूरत में अब काफी बदलाव आया है। आधुनित मेले में कल्पवासियों को किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं होती है। छोटी आयु से ही संन्यास धारण कर अपना घर बार त्याग कर भगवान के चरणों में रमे हुए हैं।
मेले के दौरान निकलने वाली शोभा यात्राओं में 56 तरह के हथियारों से करतब दिखाया जाएगा। पटाबाजी, बल्लम, फरसा, कांता, दोधारू, चौमुखी, चक्र, वननेती, धनुष बाण आदि से सुसज्जित साधु अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगे। चौरासी परिक्रमा बद्रिका वन के कुंदन बाबा वर्ष 1999 से पांचालघाट पर कल्पवास करने के लिए आ रहे हैं। कुंदन बाबा बताते हैं कि, मेले की सूरत में अब काफी बदलाव आया है। आधुनित मेले में कल्पवासियों को किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं होती है। छोटी आयु से ही संन्यास धारण कर अपना घर बार त्याग कर भगवान के चरणों में रमे हुए हैं।